देवी दुर्गा के नौ स्वरूप में प्रथम जानी जाती हैं माँ ‘शैलपुत्री’ के नाम से

देवी दुर्गा के नौ स्वरूप में प्रथम माँ ‘शैलपुत्री’ के नाम से जानी जाती हैं| माँ के शैलपुत्री’ नाम की भी कहानी है| पर्वतराज हिमालय  के घर जन्मी माँ ने पुत्री रूप में हिमालय के घर जनम लिया| इसी कारण माँ का नाम  ‘शैलपुत्री’ पड़ा।  पहले नवरात्रा में माँ के इन्हीं रूप की पूजा और उपासना की जाती है।

अपने पूर्व जन्म में ये प्रजापति दक्ष  की कन्या के रूप में सती नाम से जनम लिया| कठोर तपस्या के बाद इनका विवाह भगवान शिवजी से हुआ था।

सती ने योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को भस्म कर अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया। इस जनम में वे ‘शैलपुत्री’ नाम से विख्यात हुर्ईं। पार्वती, हिमवती भी उन्हीं के ही नाम है|

माँ ‘शैलपुत्री’ के दाहिने हाथ त्रिशूल  और बाएँ हाथ में कमल पुष्प सुशोभित है। तथा गाय माता इसकी सवारी है|

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