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अटल बिहारी वाजपेयी का हरा चुका है यह दिग्गज कांग्रेसी लीडर, रॉयल था अंदाज

वैसे तो कांग्रेस में एक से बढकऱ दिग्गज नेता गुजरे हैं, लेेकिन कुछ नेता ऐसे भी हैं जिन्होंंने अपने काम और लोकप्रियता के मामले में कई रिकॉर्ड बनाए हैं। कांग्रेस के एक ऐसे ही नेता गुजरे हैं माधराव सिंधिया, सिंधिया शाही राजघराने के बेटे थे।

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माधवराव सिंधिया लगातार 9 बार सांसद रहे। माधवराव ने 1971 में पहली बार 26 साल की उम्र में गुना से चुनाव जीता था। वे कभी चुनाव नहीं हारे। उन्होंने यह चुनाव जनसंघ की टिकट पर लड़ा था। आपातकाल हटने के बाद 1977 में हुए आम चुनाव में उन्होंने निर्दलीय के रूप में गुना से चुनाव लड़ा था। जनता पार्टी की लहर होने के बावजूद वह दूसरी बार यहां से जीते। 1980 के चुनाव में वह कांग्रेस में शामिल हो गए और तीसरी बार गुना से चुनाव जीत गए।

Madhavrao Scindia

अटल बिहारी को हराया था।

1984 में कांग्रेस ने अंतिम समय में उन्हें माधराव सिंधिया को गुना की बजाय ग्वालियर से लड़ाया था। यहां से उनके सामने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी मैदान में थे। माधराव ने वाजपेयी को भारी मतों से हराया था।

दूसरे नेताओं से हटकर था उनका अंदाज

माधवराव सिंधिया का जन्म 10 मार्च 1945 को हुआ था। माधवराव राजमाता विजयाराजे सिंधिया और जीवाजी राव सिंधिया के पुत्र थे। माधवराव ने सिंधिया स्कूल से शिक्षा हासिल की थी। माधराव का लिविंग स्टेंडर्ड भी बहुत ऊंचा था। रॉयल फैमिली से ताल्लुक रखने वाले माधराव क्रिकेट, गोल्फ, घुड़सवारी का काफी शौक रखते थे।

मां से रहे मतभेद

विजयाराजे सिंधिया अपने ही इकलौते पुत्र कांग्रेस नेता रहे माधवराव सिंधिया से बेहद नाराज रहीं। दरअसल, उनकी नाराजगी की वजह यह बताई जाती है कि, इंदिरा गांधी ने रजवाड़ों की संपत्तियों को सरकारी संपत्ति व राष्ट्रीय संपत्ति घोषित कर दिया था। इस तरह कई रजवाड़ों की संपत्तियां सरकार के अधीन आ गईं। इंदिरा गांाधी के इस फैसले से विजयाराजे सिंधिया खासी नाराज हो गईं थी। इस बात से वह इतनी नाराज हुईं कि उन्होंने जनसंघ ज्वाईन कर ली थी। वह कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ती रहीं। हालांकि, राजनीति के शुरुआत दौरे में माधराव सिंधिया भी जनसंघ से जुड़े थे, लेकिन वह बाद में कांगे्रेस से जुड़ गए। इस बात से नाराज राजमाता विजयाराजे सिंधिया और माधराव सिंधिया के बीच काफी मतभेद रहे। वसीयत को लेकर भी विजयराजे सिंधिया और राजमाता के बीच विवाद भी हुए।

हैलीकॉप्टर क्रेश में हुआ था निधन

30 सितम्बर 2001 को उत्तरप्रदेश के मैनपुरी में हेलीकाप्टर दुर्घटना में माधवराव सिंधिया की मौत हो गई थी। इसके कुछ समय पहले ही राजमाता का देहांत 25 जनवरी 2001 को हुआ था।

राजनीति में पूरा परिवार का रहा है दबदबा

सिंधिया राजघराने के राजा जीवाजी राव सिंधिया और विजयाराजे सिंधिया की तीन बच्चें माधराव सिंधिया, यशोधरा राजे सिंधिया, वसुंधरा राजे सिंधिया हैं। महाराजा जीवाजी राव सिंधिया के निधन के बाद राजमाता विजया राजे सिंधिया ग्वालियर की राजनीति में सक्रिय हुई थी और 1957 से 1991 तक आठ बार ग्वालियर और गुना से सांसद रहीं। वसुंधरा राजे राजस्थान की मुख्यमंत्री हैं। यशोधरा राजे एमपी में उद्योग मंत्री बनी। उनके बेटे माधवराव सिंधिया कांग्रेस सरकार में रेल मंत्री, मानव संसाधन विकास मंत्री रहे। जबकि विजया राजे सिंधिया के पोते ओर माधराव सिंधिया के बेटे ज्यातिरादित्य सिंधिया गुना से सांसद हैं।

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