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‘मेरी उड़ान मेरी पहचान’ के तहत हुए विविध आयोजन

जयपुर। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद् द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से गुरूवार को शिक्षा संकुल में अन्तर्राष्ट्रीय बालिका दिवस बालिकाओं के विकास  पर  ‘मेरी उड़ान मेरी पहचान’ कार्यक्रम के साथ समारोहपूर्वक मनाया गया।  इस दौरान बालिकाओं को कैरियर मार्गदर्शन, उनको आत्मनिर्भर बनने, सशक्त किए जाने से संबंधित विशेष व्याख्यान भी विषय विशेषज्ञों द्वारा हुए।
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद् की राज्य परियोजना निदेशक श्रीमती शिवांगी स्वर्णकार ने बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य के संदेश के साथ उन्हें निरंतर आगे बढ़ने और जीवन में सदा नया कुछ करते अपनी राह खुद बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बालिकाएं देश का भविष्य हैं। यदि वे पढ़ती हैं तो पूरा समाज अपने आप ही पढ़ जाएगा।
इस मौके पर बालिकाओं को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के लिए करियर काउन्सलर श्री दलवीर सिंह ने महत्वपूर्ण जानकारियां दी। बालिका शिक्षा उपायुक्त श्रीमती स्नेहलता हारित, श्रीमती तुलिका सैनी, डॉ. प्रिया बलराम, श्रीमती रक्षा पारीख एवं श्रीमती सावित्री शर्मा ने बालिकाओं को प्रेरित करते हुए जीवन के हर क्षेत्र में ऊंचाईयां छूने का आह्वान किया। बालिकाओं से खुले संवाद में स्कूल शिक्षा परिषद् के अधिकारियों ने अपने अनुभव भी साझा किए तथा बालिकाओं को स्वावलम्बी बनने के लिए प्रेरित किया। उप निदेशक डॉ. सीमा पाराशर ने बताया कि अन्तर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर 107 बालिकाओं ने ‘मेरी उड़ान मेरी पहचान’ विषयक आयोजनों में अपने स्तर पर भविष्य की योजनाओं को गुना और बुना। कार्यक्रम में बालिकाओं ने बालिका शिक्षा पर रोल प्ले कर अपना संदेश दिया। इस मौके पर बालिकाओं ने अपने भविष्य के स्वप्नों के बारे में विचार भी रखे।
जिला परियोजना समन्वयक श्री विष्णुदत्त स्वामी ने बालिका शिक्षा को महत्वपूर्ण बताया। इस दौरान अध्यापिका मंच द्वारा बेटी बचाओं-बेटी पढ़ाओ पर संकुल में ही कला प्रदर्शनी भी लगाई  गयी। इसमें बालिका सशक्तिकरण से जुड़े मुद््दों पर महत्ती सामग्री का प्रदर्शन किया गया। बालिकाओं ने समारोह में हस्ताक्षर अभियान कर अपने करियर लक्ष्य को लिखा और उसे पूरा करने का संकल्प लिया। ऎजुकेट गल्र्स, प्लान इंडिया, सेव द चिल्ड्रन, संधान, प्रवाह आदि संस्थाओं ने भी समारोह में भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आराधना यादव ने किया।
उल्लेखनीय है कि अन्तर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य में राज्य के विभिन्न विद्यालयों में भी अपने-अपने स्तर पर समारोहों का आयोजन किया गया। इनमें बालिकाओं को एक दिन हेतु संस्थाप्रधान एवं कक्षा का शिक्षक बनाया गया। साथ ही विभिन्न गतिविधियों का भी संचालन किया गया।
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