105 साल की परदादी बनीं मिल्खा सिंह, 100 मीटर की रेस अकेले दौड़ीं और तोड़ा नेशनल रिकॉर्ड

‘बूढ़ापा आ गया रे’ आज कल के नौजवानों के मुंह से 30-35 की उम्र में ही आप सभी ने ये शब्द जरूर सुने होंगे। प्रदूषित वातावरण, खराब दिनचर्या और अस्वास्थ्यकर भोजन इसकी बड़ी वजह हैं। अगर आप अपने शरीर पर पूरी तरह से ध्यान देते हैं तो बुढ़ापे में भी जवानी का लुत्फ उठा सकते हैं।

ऐसा ही उदहारण हरियाणा की 105 वर्षीय रामबाई ने पेश किया है। परदादी की उम्र में रामाबाई राष्ट्रीय ओपन मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप (एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित) में मिल्खा सिंह बनीं और 100 व 200 मीटर रेस में गोल्ड मेडल जीते। इस दौरान उन्होंने 100 मीटर की रेस में नेशनल रिकॉर्ड भी तोड़ा।

15 जून को वडोदरा में हुए इस टूर्नामेंट की 100 मीटर की दौड़ में रामाबाई ने अकेले दौड़ लगाई। दरअसल, इस प्रतियोगिता में 85 वर्ष से ऊपर का ही प्रतियोगी हिस्सा ले सकता था, जब रामाबाई को कोई प्रतियोगी नहीं मिला तो उन्होंने अकेले दौड़ लगाते हुए 45.40 सेकंड में रेस पूरी की और नेशनल रिकॉर्ड धवस्त किया। इससे पहले ये रिकॉर्ड मान कौर के नाम था, जिन्होंने 74 सेकंड में रेस पूरी की थी। इस परदादी की नजरें अब अतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेने पर है।

वहीं जब उनकी पोती से रामाबाई की डाइट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा “वह शुद्ध शाकाहारी हैं। नानी प्रतिदिन लगभग 250 ग्राम घी और 500 ग्राम दही खाती हैं। वह दिन में दो बार 500 मिलीलीटर शुद्ध दूध पीती हैं। उन्हें बाजरा की रोटी (बाजरे से बनी फ्लैट रोटी) पसंद है और वह चावल ज्यादा नहीं खातीं। मेरी नानी खेतों में बहुत काम करती हैं। एक सामान्य दिन में वह 3-4 किमी दौड़ती हैं। वह जो खाना खाती हैं, वह ज्यादातर गांव में उगाई जाती है।”

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