जरूर पढ़ें : कहीं आप भी इमोशनल ईटिंग के शिकार तो नहीं?

स्वादिष्ट खाना खाने का मन तो हर किसी का होता है लेकिन कई बार भूख न होते हुए भी खाने की इच्छा होती है। जब ये कभी-कभार हो तो चलता है। आपके सामने लज़ीज व्यंजन आ जाए और आपसे रहा न जाएं, लेकिन जब ये बार-बार हो कि बिना भूख आपको खाना अच्छा लगता है या जब आप बोर हो रहे हो या परेशान हो तो खाना खाने लगें। ये इमोशनल ईंटिंग डिसॉडर कहलता है। तब–तब खाना जब-जब आप दुखी हो ये एक तरह की मानसिक प्रक्रिया है जिसमें दिमाग का एक हिस्सा कुछ खाने के बाद कुछ देर के लिए पर्याप्त संतुष्टी पाता है। लेकिन ये संतुष्टी एक बीमारी की ओर ले जाती है। ओबेसिटी, मानिसक अवसाद और इससे जुड़ी तमाम बीमारियां। तो आइए जानते हैं कि इमोशनल ईटिंग डिसॉडर से कैसे बचा जा सकता है।

नाश्ता जरूर करें-

चाहें आप कितने भी दुखी हो या परेशान, नाश्ता जरूर करें। ये आपके पूरे दिन का सबसे जरूरी हिस्सा है जिसे आपको लेना ही है। नाश्ता काफी रिच लें ताकि आप इसे खाने के बाद संतुष्ट महसूस करें। कई शोध में ये बात सामने आई है कि अगर आप प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फैट से भरपूर नाश्ता करते हैं तो सारे दिन आप संतुष्ट रहेंगे। खास कर जो नाश्ता या तो स्किप कर देते है या बहुत ही लाइट लेते हैं। इससे दिनभर कुछ न कुछ खाने की इच्छा बनी रहती है और जब आप परेशान होते हैं तो सबसे पहले आपका दिमाग खाना ही मांगता है।

संपूर्ण अनाज लें-

जब भी खाएं आपका खाना संपूर्ण अनाज का कांबिनेशन होना चाहिए। उसमें सब्जी, फल, पूर्ण अनाज, नट्स, बीन्स, फिश या चिकेन आदि होना ही चाहिए। कभी भी प्रोसेस फूड न खाएं क्योंकि इसमें चीनी और नमक बहुत होता क्योंकि ये प्रिर्जवेटिव के लिए होता है। ऐसे खाने आपको कभी भी पूर्ण संतुष्टी नहीं देते और बार बार आपको कुछ न कुछ खाने का मन करता रहेगा।

खाने से पहले रुकें, सोचें फिर खाएं-

जब भी आपको भूख लगे आप पहले रुकें। सोचें की क्या आप वास्तविक रूप से भूखे हैं? आप तनाव में हो तब भी और न हो तब भी। हर बार खाना खाने से पहले यह सवाल खुद से जरूर करें। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि खाने में जो खाएं उसे ये सोच कर खाएं कि इससे बेहतर खाना कुछ नहीं हो सकता। दिमाग को संतुष्ट कर के ही आप ओवर ईटिंग से बच पाएंगे।

धीरे-धीरे खाएं-

खाना जल्दी में नहीं बल्कि एक-एक कौर को स्वाद लेकर खाएं। खूब चबाएं और फिर खाएं। खाने के साथ लिक्विड या पानी को बार बार न लें क्योंकि इससे पेट फूलेगा और भरे का अहसास होगा। पानी शरीर से निकलते ही आपको फिर से खाने का मन होगा। यही नहीं ज्यादा पानी पीते हुए खाना खाने से एसिडिटी की समस्या भी होती है।

बच्चों की तरह सोएं-

खाने से इतर जो सबसे जरूरी है वह सोना। बच्चों की तरह सोने की आदत डालें। सो जाने के बाद एक लंबी नींद मिले। खास कर रात में बार- बार उठना आपके इमोशनल ईटिंग डिसॉडर का बड़ा कारण है। कई बार लोग रात में उठने के बाद कुछ मीठा खाना खोजते हैं ताकि उनकी मास्तिष्क की तरंगे शांत हो और वह खुद को संतुष्ट महसूस करें। इस आदत को तुरंत बदलें।