Breaking News
Home / ज्योतिष / शारदीय नवरात्र 2018: जानिए माता रानी के नौ रूपों के बारे में

शारदीय नवरात्र 2018: जानिए माता रानी के नौ रूपों के बारे में

शारदीय नवरात्र आज से देशभर में शुरू हो चुका हैं। इस पर्व के दौरान माता रानी की विशेष पूर्जा अर्चना ​की जाती हैं। देशभर के कई राज्यों में नौ दिन तक माता की पूजा-अर्चना की जाती हैं।

Loading...

चलिए आपको माता रानी के नौ रूपों के बारे में बताते हैं। धर्म ग्रंथों के मुताबिक, नवरात्र में हर तिथि पर माता के एक विशेष रूप की पूजा करने से भक्त की हर मनोकामना पूरी होती है। जानिए नवरात्र में किस दिन देवी के कौन से स्वरूप की पूजा करें-

हिमालय की पुत्री हैं मां शैलपुत्री
शारदीय नवरात्र की प्रतिपदा तिथि यानी प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मार्कण्डेय पुराण के मुताबिक देवी का यह नाम हिमालय के यहां जन्म होने से पड़ा। हिमालय हमारी शक्ति, दृढ़ता, आधार और स्थिरता का प्रतीक है। मां शैलपुत्री को अखंड सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है।

नवरात्र के प्रथम दिन योगीजन अपनी शक्ति मूलाधार में स्थित करते हैं और योग साधना करते हैं। हमारे जीवन प्रबंधन में दृढ़ता, स्थिरता और आधार का महत्व सर्वप्रथम है। इसलिए इस दिन हमें अपने स्थायित्व और शक्तिमान होने के लिए माता शैलपुत्री से प्रार्थना करनी चाहिए।

शैलपुत्री की आराधना करने से जीवन में स्थिरता आती है। हिमालय की पुत्री होने से ये देवी प्रकृति स्वरूपा भी है। स्त्रियों के लिए उनकी पूजा करना ही श्रेष्ठ और मंगलकारी है।

मां ब्रह्मचारिणी: नवरात्रि की द्वितिया तिथि पर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना होती है। देवी ब्रह्मचारिणी ब्रह्म शक्ति यानी तप की शक्ति का प्रतीक हैं।

मां चंद्रघंटा: नवरात्र की तृतीया तिथि यानी तीसरा दिन माता चंद्रघंटा को समर्पित है। ये शक्ति माता का शिवदूती स्वरूप है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है।

मां कूष्मांडा देवी: नवरात्र की चतुर्थी तिथि की प्रमुख देवी मां कूष्मांडा हैं। देवी कूष्मांडा रोगों को तुरंत नष्ट करने वाली हैं। इनकी भक्ति करने वाले श्रद्धालु को धन-धान्य और संपदा के साथ-साथ अच्छा स्वास्थ्य भी प्राप्त होता है।

देवी स्कंदमाता : नवरात्र के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा अर्चना की जाती है। स्कंदमाता भक्तों को सुख-शांति प्रदान वाली हैं। देवासुर संग्राम के सेनापति भगवान स्कंद की माता होने की वजह से मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जानते हैं।

देवी कात्यायनी: नवरात्र की षष्ठी तिथि पर आदिशक्ति दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा करने का विधान है। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसलिए वे कात्यायनी कहलाती हैं।

देवी कालरात्रि: महाशक्ति मां दुर्गा का सातवां स्वरूप है कालरात्रि। मां कालरात्रि काल का नाश करने वाली हैं, इसी कारण से इन्हें कालरात्रि कहा जाता है। मां कालरात्रि की आराधना के वक्त भक्त को अपने मन को भानु चक्र जो ललाट अर्थात सिर के मध्य स्थित करना चाहिए।

मां महागौरी: नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। आदिशक्ति श्री दुर्गा का अष्टम रूप श्री महागौरी हैं। मां महागौरी का रंग अत्यंत गोरा है, इसलिए इन्हें महागौरी के नाम से जाना जाता है।

मां सिद्धिदात्री: नवरात्र के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री भक्तों को हर प्रकार की सिद्धि प्रदान करती हैं। अंतिम दिन भक्तों को पूजा के समय अपना सारा ध्यान निर्वाण चक्र, जो कि हमारे कपाल के मध्य स्थित होता है, वहां लगाना चाहिए।

नवयुग संदेश परिवार की ओर से आप सभी को शारदीय नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएं.

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *