औषधीय गुणों से भरपूर है नीम का वृक्ष, जानिए आता है कितने काम

जहाँ एक ओर आयुर्वेद के नीम के औषधीय गुणों का बखान है वहीं आधुनिक विज्ञान भी सेहत, खेती-बाड़ी और पर्यावरण संबंधित समस्याओं के सफल निवारण के लिए नीम का ही सहारा लिए है।

आदिवासी अंचलों में नीम को एक अतिमहत्वपूर्ण औषधीय वृक्ष के तौर पर देखते हैं, । आइये हम और आप भी इन नुस्ख़ों को जानें और इनका बहुत भरपूर लाभ उठाएं।

आदिवासियों के दैनिक जीवन में नीम एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आदिवासियों के अनुसार, नीम के पत्ते और मकोय के फ़लों का रस समान मात्रा में लेकर पलकों पर लगाने से आंखों का लालपन दूर हो जाता है।

जूएं दूर करें – नीम की निबौलियों को पीसकर रस तैयार कर लिया जाए और इसे बालों पर लगाया जाए तो जूएं मर जाते हैं।

त्वचा रोग में राहत पहुंचाए – गर्मियों में होने वाली घमौरियों से छुटकारा पाने के लिए नीम की छाल को घिसकर लेप तैयार कर लिया जाए और उन हिस्सों पर लगाया जाए जहाँ घमौरियां और फुंसिया हो, आराम मिल जाता है। पानी में थोड़ी सी नीम की पत्तियां डालकर नहाने से भी घमौरियां दूर हो जाती है।

गले का दर्द दूर करने का अचूक नुस्खा – गले की सूजन दूर करने के लिए पातालकोट के आदिवासी नीम की पत्तियां (५ ग्राम), ४ कालीमिर्च, २ लौंग और चुटकी भर नमक को मिलाकर काढ़ा बना लेते है और रोगी को दिन में तीन बार सेवन की सलाह देते हैं।

डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए अमृत समान – डाँग- गुजरात के आदिवासियों के अनुसार नीम के गुलाबी कोमल पत्तों को चबाकर रस चूसने से मधुमेह रोग मे आराम मिलता है। कुछ आदिवासी नीम की पत्तियों के रस में दालचीनी का चूर्ण मिलाकर मधुमेह के रोगियों को देते हैं और उसके परिणाम भी काफ़ी चौंकाने वाले हैं हलाँकि इसके कोई भी क्लीनिकल और वैज्ञानिक प्रमाण अब तक देखने नहीं मिले, फिर भी इस पारंपरिक नुस्खे को आजमाने में कोई बुराई नहीं।

पुराने दाग-धब्बे कम करे – डाँग में आदिवासी लगभग २०० ग्राम नीम की पत्तियों को २ लीटर पानी में उबालते हैं और जब पानी का रंग हरा हो जाता तब उस पानी को बोतल में छान कर रख लेते है। नहाने के वक्‍त बाल्टी में ७५ से १०० मिलीलीटर इस नीम के पानी को डाल दिया जाता है। इन जानकारों के अनुसार नहाने का पानी संक्रमण, मुँहासे और शरीर से पुराने दाग- धब्बों से छुटकारा दिलाता है।

यह नुस्खा खांसी से राहत पाने में बहुत मददगार है, जानिए