नेपाल ने तीन भारतीय क्षेत्र को अपने नक्शे में किया शामिल, भारत ने कहा- यह कतई मंजूर नहीं

शनिवार को नेपाल की तरफ से नक्शे में बदलाव करने और कुछ भारतीय क्षेत्र को शामिल करने पर भारत ने कड़ी नाराजगी जताई है। भारत का कहना है कि नेपाल द्वारा संविधान संशोधन विधेयक को संसद के निचले सदन द्वारा पारित किया जाना कृत्रिम विस्तार साक्ष्य और ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं है। यह लंबित सीमा मुद्दों का बातचीत के जरिए समाधान निकालने की मौजूदा समझ का उल्लंघन भी है। बता दे भारत ने इस विधेयक को सिरे से नकार दिया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव के मुताबिक भारत नेपाल द्वारा संसोधित नक़्शे में उत्तराखंड के कालापानी, धारचूला और लिपुलेख को शामिल करने के मुद्दे को लेकर नेपाल सरकार के सामने अपनी स्थिति पहले ही स्पष्ट कर चुका है। गौरतलब है कि शनिवार को नेपाल ने संसद के निचले सदन में देश के एक राजनीतिक नक्शे में बदलाव कर उसे मंजूरी दे दी है। नेपाल ने नए नक्शे में लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को अपने क्षेत्र में दिखाया है।

नक्शे में बदलाव के विधेयक का समर्थन विपक्षी नेपाली कांग्रेस, जनता समाजवादी पार्टी- नेपाल, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने किया। बता दे भारत और नेपाल के संबंध उस समय तनावपूर्ण हो गए थे, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सड़क का 8 मई को उद्घाटन किया था। यह सड़क लिपुलेख दर्रे को धारचूला से जोड़ती है। इसके निर्माण पर नेपाल ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दावा किया था कि यह क्षेत्र नेपाल के क्षेत्र से होकर गुजरता है।

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