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ईरान के शीर्ष कमांडर कासिम सुलेमानी के मौत से पूरे विश्व पर पड़ेगा ये असर

पिछले शुक्रवार अमेरिका ने ईरान के शीर्ष कमांडर कासिम सुलेमानी को एयरपोर्ट से निकलते समय मार गिराया। इनकी मौत के बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का माहौल बढ़ गया है। माना जा रहा है इराक के अमेरिकी दूतावास में हाल ही में हुए रॉकेट हमले के पीछे ईरान का हाथ है। अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को पलटवार करते हुए चेतावनी दी कि ईरान के 52 ठिकाने अमेरिका के टारगेट में है। कुछ विशेषज्ञों ने इस तनाव के माहौल को इतना महत्वपूर्ण माना की इससे तीसरे विश्वयुद्ध की शुरुआत भी हो सकती है।

आइए जानते हैं कि कासिम सुलेमानी ईरान के लिए इतने महत्वपूर्ण महत्वपूर्ण क्यों है? जिनकी मौत से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का माहौल इतना अधिक बढ़ गया है।

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कासिम सुलेमानी का जीवन और सफलताः

ईरान के कमरान प्रांत के कनात ए मलिक गांव में बेहद गरीब परिवार में 11 मार्च 1957 को कासिम सुलेमानी का जन्म हुआ था। लेकिन बाद में ईरान की रिवोल्यूशनरी  गार्ड में शामिल होकर इन्होंने ईरान में अपना नाम बनाना शुरू किया। धीरे-धीरे यह ईरान के सर्वोच्च नेता और शीर्ष धार्मिक नेता अयातुल्ला खोमेनेयी के बहुत करीब हो गए। कमांडर सुलेमानी का व्यक्तित्व बहुत ही करिश्माई था। इनकी प्रसिद्धि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे ईरान में वृत्तचित्रो, समाचारों और यहां तक कि पॉप गीतों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए थे। 2013 में सी आई ए के पूर्व अधिकारी जॉन मैड्यूरे ने सुलेमानी को पश्चिम एशिया का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बताया था।

अमेरिका के मुख्य टारगेट पर क्यों कासिम सुलेमानीः

माना जाता है कि 2003 में इराक में हुए अमेरिकी हमले के बाद जनरल सुलेमानी ने वहां के आतंकवादी समूहों को अमेरिकी सैनिकों और उनके ठिकानों पर हमला करने के लिए प्रेरित किया था। हमले हुए और इस हमले में सैकड़ों अमेरिकी मारे गए। इसे ध्यान में रखते हुए 2019 को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने  ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स और कुद्स फोर्स  को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था। अमेरिका के ट्रंप प्रशासन के द्वारा जारी किए गए बयान के मुताबिक जिसे अमेरिका ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है। उसे कुद्स फोर्स के जरिए ही प्रशिक्षण मिला है।

इसी कुद्स फौज के कमांडर सन 1998 में कासिम सुलेमानी बने थे। इन्होंने कई गुप्त अभियानों और मिलिशिया सैनिक नेटवर्क तैयार किया था। कुद्स सेना का प्रमुख होने के साथ ही, कासिम सुलेमानी को पश्चिम एशिया में ईरान की गतिविधियों को संचालित करने की जिम्मेदारी मिली हुई थी। सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असीद की विद्रोही लड़ाई, इराक में ईरान के पैरामिलिट्री का उदय, इस्लामिक स्टेट के खिलाफ हुए जंग, के साथ अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों में कासिम सुलेमानी को ही प्रमुख रणनीतिकार माना जाता है।

यह भी कहा जाता है कि इराक में पूर्व तानाशाह सद्दाम हुसैन के खिलाफ हुए विद्रोह में शिया मुस्लिम और कुर्द लड़ाकों की सहायता कासिम सुलेमानी ने ही की थी। इसके साथ ही लेबनान में शिया आतंकवादी समूह हिज्बुल्लाह तथा फलस्तीनी इलाके में इस्लामिक संगठन हमास को बनने से लेकर बड़ने तक में इन्होंने मदद की है। कासिम सुलेमानी की ईरानी सहायता के साथ ही रूसी वायु सेना के समर्थन से वहां हुए, विद्रोहियों पर काबू पाने में बशर अल असद को सफलता मिली थी।

कासिम सुलेमानी ने पश्चिम एशिया में ईरान की रसूख और ताकत को बढ़ाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इन्ही सभी कारणों से कासिम सुलेमानी ईरान और इराक तथा पश्चिम एशिया के महत्वपूर्ण और ताकतवर व्यक्ति माने जाते हैं। साथ ही अमेरिका की आंखों की सबसे बड़ी किरकिरी भी यही थे। यही कारण है कि पिछले कई सालों से अमेरिका कासिम सुलेमानी को टारगेट बनाए हुए था।

अमेरिका द्वारा कासिम सुलेमानी की हत्या का असर पूरी दुनिया परः

अमेरिकी एयर स्ट्राइक के द्वारा ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। पूरी दुनिया दो अलग हिस्सों में बट गई है। रूस, चीन समेत कई महत्वपूर्ण शक्तियां ईरान के पक्ष में है। तो इजराइल ने ने अमेरिका का खुलकर सपोर्ट किया है। वहीं पाकिस्तान किसी मुद्दे और विवाद में ना पढ़ते हुए बड़ी चतुराई से अमेरिका को संयम बनाये रखने की अपील करते हुए निकल गया। इस मामले में भारत, अमेरिका या ईरान किसके साथ होगा यह देखने वाली बात है। भारत के लिए अमेरिका महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। वहीं ईरान से भी उसके बहुत पुराने मजबूत संबंध है।

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