‘मंकीपॉक्स वायरस से घबराने की जरूरत नहीं’

तेलंगाना के अपोलो क्रैडल एंड चिल्ड्रन हॉस्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ ए पाणि ने कहा कि मंकीपॉक्स वायरस अन्य व्यक्ति में प्रसारित होने में अधिक समय लगता है, जिससे घबराने की जरूरत नहीं है। डा. पाणि ने एक विज्ञप्ति में बताया कि मंकीपॉक्स में खसरा और चिकन-पॉक्स जैसे वायरस के भी लक्षण शामिल हैं। इस वायरस से लोग ठीक हो जाते हैं लेकिन कभी –कभी आंख, मस्तिष्क में संक्रमण का खतरा उत्पन्न हो जाता है।

बाल रोग विशेषज्ञ ने कहा कि गर्भवती महिलाओं और आठ वर्ष से कम उम्र के बच्चों को इस वायरस से अधिक खतरा होता है। उन्होंने कहा कि टीका वायरस के खतरे को कम करने में सहायक है। डा. पाणि ने कहा कि मंकीपॉक्स के मामले में दो टीकों को खाद्य एवं औषधि प्राधिकरण (एफडीए)- जिनियोस और एसीएएम2000 द्वारा अनुमोदित और लाइसेंस दिया गया है, लेकिन दोनों अभी तक भारत में उपलब्ध नहीं हैं।

उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं पूर्व मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के माध्यम से इस वायरस की चपेट से छुटकारा पा सकती हैं। उन्होंने बताया कि मंकीपॉक्स संक्रमण शारीरिक संपर्क से फैलता है। इस वायरस के लक्षणों के स्पष्ट होने में पांच दिनों से लेकर तीन सप्ताह तक का समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों में इसका जोखिम कम है।

उन्होंने कहा कि बचाव के उपाय करने पर इस वायरस से बचा जा सकता है। इस वायरस के लक्षण, शरीर पर दाने, बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान है। इन लक्षणों के उत्पन्न होने पर व्यक्ति को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। बाल रोग विशेषज्ञ ने कहा कि ऐसे लक्षण दिखाई देने पर, रक्त जांच की जा सकती है। देश में अभी मंकीपॉक्स के मामले बहुत कम है।

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