सिर्फ उत्पाद ही नहीं अब भारत ने चीन की भाषा भी ठुकराई, लिया यह बड़ा फैसला

भारत के साथ सीमा पर जानबूझकर विवाद उत्पन्न करना चीन को हर मोर्चे पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। गलवान घाटी में दोनों देशों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद से ही भारत में चीनी उत्पादों को लेकर मुहिम छिड़ी हुई है। केंद्र सरकार ने तो देश की सुरक्षा और संप्रभुता को खतरा बताते हुए अब तक करीब 100 से अधिक चीनी एप्स को प्रतिबंधित कर दिया है। जिसमें टिक टॉक, यूसी न्यूज़, यूसी ब्राउजर, शेयर चैट जैसे कई बड़े एप्स का नाम भी शामिल है।

अब भारत सरकार ने चीन के खिलाफ एक और बड़ा कदम उठाते हुए उसकी भाषा को भी ठुकरा दिया है। हाल ही में कैबिनेट की ओर से मंजूर नई शिक्षा नीति में चाइनीज को विदेशी भाषाओं की उस सूची में शामिल नहीं किया गया है, जिन्हें सेकेंड्री स्कूल लेवल पर छात्रों को पढ़ाया जाएगा। इस लिस्ट में फ्रेंच, जर्मन, जापानी, कोरियन, स्पैनिश, पोर्तगीज, रसियन, और थाई भाषा को विकल्प के रूप में रखा गया है, जिन्हें छात्र द्वारा चुना जा सकता है।

बता दे पिछले साल जब नई शिक्षा नीति का मसौदा जारी किया गया था तब इसमें फ्रेंच, जर्मन, जापानी और स्पैनिश के साथ चाइनीज का जिक्र हुआ था। लेकिन चीन के साथ सीमा विवाद के बाद भारत सरकार पूरी सख्ती के मूड में है। सूचना-प्रसारण और मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बुधवार को जारी NEP में चाइनीज को हटा दिया है। माना जा रहा है कि यह फैसला चीन के साथ चरम पर पहुंचे तनाव की वजह से लिया गया है।

यह भी पढ़े: छिन गई CISF जवानों की सोशल मीडिया आजादी, विभाग को देनी होगी जानकारी
यह भी पढ़े: पर्यटकों को आकर्षित करेगी राम जन्मभूमि अयोध्या, केंद्र सरकार कर रही बड़े प्रयास