मोटापा हड्डियों के लिए बहुत नुकसानदेह होता है, जानिए कैसे ?

जीवनशैली में बदलाव के चलते मोटापे के बाद वजन कम करने का चलन आम हो चुका है। दोनों स्थितियों में हड्डियों को स्थायी नुकसान पहुंचता है।

मोटापे के कारण एक खास तरह के फ्रैक्चर्स के मामलों में वृद्धि हो रही है। आमतौर पर ये फ्रेक्चर कम उम्र की महिलाओं में अधिक देखने को मिल रहे हैं.

आमतौर पर लोग उन बीमारियों के बारे में तो बात करते हैं, जो इंसानों को मोटापे के कारण घेर रही हैं। लेकिन इस तरफ शायद ही किसी का ध्यान ज्यादा है कि मोटे लोगों में एक खास तरह के फ्रैक्चर यानी हड्डी के टूटने की समस्या अधिक होती है। आज यहां इसी बारे में जानेंगे…

सभी के लिए मोटापा एक मुसीबत बनता जा रहा है। यह स्थिति पिछले करीब एक दशक में अधिक बढ़ी है क्योंकि इस बीच हमारी जीवन में तकनीकी सुविधाओं का बहुत तेजी से विकास हुआ है। कारण चाहे जो भी हो लेकिन परिणाम यही है कि पूरी दुनिया के साथ ही हमारे देश में भी मोटापे की समस्या लगातार बढ़ रही है।

महिलाओं में अधिक है यह खतरा
-आप जानते हैं कि महिलाओं के शरीर में 30 साल की उम्र के बाद प्राकृतिक कैल्शियम की कमी होने लगती है। यदि भोजन और सप्लिमेंट्स के जरिए इस कमी को पूरा ना किया जाए तो उनकी हड्डियां कमजोर होकर खोखली होने लगती हैं।

-इसके साथ ही यह बात भी साफ है कि भारतीय महिलाओं की शारीरिक बनावट इस तरह की होती है कि उनके शरीर के निचले हिस्से पर वसा अधिक और बहुत जल्दी जमा होती है। इस कारण उनके शरीर का निचला हिस्सा अपेक्षाकृत भारी हो जाता है। जिसका हिप बोन्स पर सीधा असर पड़ता है।

-सामान्य महिलाओं की तुलना में मोटापे से ग्रसित महिलाओं में हिप फ्रैक्चर के बाद डेथ रिस्क भी कहीं अधिक होता है। क्योंकि बोन लॉस की तेज प्रक्रिया के चलते उनकी हड्डी को जोड़ पाना कहीं अधिकि चुनौतिपूर्ण हो जाता है। साथ ही इस कारण उन्हें कई दूसरी सेहत संबंधी बीमारियां घेर लेती हैं।

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