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लोकसभा चुनाव 2019: उम्मीदवारों और पार्टियों से प्रगति और प्रदर्शन रिपोर्ट की करें मांग

भारत के उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि लोगों को भी उम्मीदवारों और पार्टियों से जवाबदेही और प्रदर्शन रिपोर्ट लेनी चाहिए। नायडू ने आतंकवाद के प्रकोप को खत्म करने, जलवायु परिवर्तन से निपटने, सामाजिक विषमताओं को दूर करने, गरीबी को कम करने और एक शांतिपूर्ण, सामंजस्यपूर्ण और खुशहाल राष्ट्र बनाने हेतु शहरी ग्रामीण विभाजन को कम करने के लिए ठोस प्रयास करने का आह्वान किया है।

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कानून के‍ नियम, लोकतंत्र, सतत विकास और शांति के क्षेत्र में उनके योगदान के सम्‍मान में कोस्टा रिका के पीस विश्वविद्यालय द्वारा हाल में उन्‍हें प्रदत्‍त डॉक्टर ओनोरिस कोसा की उपाधि के बाद आज उपराष्ट्रपति के मित्रों और शुभचिंतकों द्वारा विशाखापट्टनम में आयोजित एक सम्मान समारोह में बोलते हुए, उन्होंने जोर देकर कहा कि शांति किसी भी राष्ट्र की प्रगति के लिए एक पूर्व शर्त है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह का संघर्ष या अराजकता क्षेत्र के विकास की संभावनाओं को रोक देगी। उन्होंने कहा कि ‘’अगर कहीं कोई तनाव है तो विकास पर ध्यान नहीं दिया जा सकता।‘’

नायडू ने कहा कि यह सुनिश्चित करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि हमारे देश में सामाजिक सद्भाव को किसी भी तरह से नुकसान न पहुंचे। उन्होंने मीडिया से आह्वान किया कि वे पार्टियों और उम्मीदवारों का एक प्रदर्शन लेखा परीक्षा करें और लोगों के सामने एक प्रगति रिपोर्ट रखें ताकि उन्हें चयन के लिए सुविज्ञ विकल्प दिया जा सके। उन्होंने कहा कि लोगों को भी उम्मीदवारों और पार्टियों से जवाबदेही और प्रदर्शन रिपोर्ट लेनी चाहिए।

राजनेताओं द्वारा दलों को बदलने की प्रवृत्ति का उल्लेख करते हुए,  उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे लोगों को फिर से चुनाव की इच्‍छा जताने से पहले अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

लोकतंत्र को मजबूत करने में चुनावी प्रक्रिया के महत्व का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि लोगों को चरित्र, योग्‍यता, क्षमता और अच्छे आचरण वाले प्रतिनिधियों का चयन करना चाहिए। लोगों से अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अपील करते हुए, श्री नायडू ने कहा कि मतदान करना केवल एक अधिकार नहीं है, बल्कि संविधान के निर्माताओं द्वारा नागरिकों पर एक जिम्मेदारी दी गई थी।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत हमेशा से शांति का समर्थक रहा है और “वसुधैव कुटुम्बकम” के दर्शन में विश्वास करता है जो पूरी दुनिया को एक परिवार मानता है। उन्होंने कहा कि भारत अनादि काल से शांति और अहिंसा का उपासक रहा है जो हमेशा सभी देशों और दुनिया भर के लोगों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध रखना चाहता है।

मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित होने का उल्‍लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि सम्मान किसी व्यक्ति के लिए नहीं है बल्कि यह वैश्विक दर्शन और भारतीय दर्शन में अंतर्निहित शांति और सद्भाव के सदियों पुराने मूल्यों की मान्यता का प्रतिबिंब है।

उन्होंने कहा कि यह देखते हुए कि उन्‍होंने ऐसे समय मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है जब दुनिया गांधी जी की 150 वीं जयंती मना रही है, जिन्होंने दुनिया के समक्ष अहिंसा की शक्ति का प्रदर्शन किया था, वह दोगुना सम्मानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि शांति किसी भी राष्ट्र की प्रगति के लिए एक पूर्व शर्त है। उन्‍होंने कहा कि किसी भी तरह का संघर्ष या अराजकता क्षेत्र के विकास की संभावनाओं को बाधित कर देगी।

इसका उल्‍लेख करते हुए कि भारत सीमापार आतंकवाद के खतरे का शिकार रहा है, उपराष्ट्रपति ने कहा कि आतंकवाद का उपचार कभी भी नरम रवैये के साथ नहीं किया जा सकता है। उन्होंने विश्व समुदाय से अपील की कि वे एकजुट होकर आतंकवाद का समूल नाश कर दें।

श्री नायडू ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को भारत द्वारा प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन पर जल्द से जल्द विचार-विमर्श करना चाहिए और आतंक को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें उन लोगों का नाम उजागर करने और उनको दी जाने वाली सहायता में कटौती करने की जरूरत है जो देश की नीति के रूप में आतंक को बढ़ावा देते हैं।

उपराष्ट्रपति ने प्रत्येक नागरिक से पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रयास करने, प्रदूषण को कम करने, हरियाली को बढ़ावा देने, जल निकायों का संरक्षण करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि विकास से प्राकृतिक संसाधन बाधित न हों।

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