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सामान्य वर्ग के गरीबों को 10% आरक्षण के बिल को सुप्रीम कोर्ट में मिली चुनौती

सामान्य वर्ग के गरीबों को आर्थिक आधार पर सरकारी नौकरी और शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश में आरक्षण का प्रावधान करने वाले विधेयक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है । कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल हुई है जिसमें इस विधेयक को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। यह याचिका यूथ फार इक्वेलिटी की ओर से दाखिल की गई है। कोर्ट में दाखिल हुई जनहित याचिका में संसद से पारित विधेयक को संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ बताते हुए रद करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में उपबंध 15(6) और 16(6) जोड़ने का प्रावधान किया गया है जिसके जरिये आर्थिक आधार पर 10 फीसद आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है।

संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा नेगरीबों को दस फीसद आरक्षण देने का संविधान में प्रावधान किये जाने पर मुहर लगाई थी। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ये कानून की शक्ल ले लेगा।

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याचिका में कहा गया है कि आर्थिक आरक्षण सिर्फ सामान्य वर्ग तक सीमित नहीं रखा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ अपने फैसले में कह चुकी है कि आरक्षण की कुल सीमा 50 फीसद से ज्यादा नहीं हो सकती है ।

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