सुअर का खून बताएगा कितना खतरनाक है ये जापानी बुखार, बच्चों में फैलती है बीमारी

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) द्वारा भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली के सहयोग से जापानी मस्तिष्क बुखार (जापानी इन्सेफलाइटिस) की रोकथाम के लिए एक अभिनव पहल की गई है। परिषद द्वारा बरेली के उक्त संस्थान से प्रोटीन आधारित एक स्ट्रिप विकसित की गई है

जिससे क्षेत्र विशेष में सुअरों के खून से बीमारी की स्थिति और उसकी भयावहता का पता चल सकेगा। यह बीमारी बच्चों में सुअरों के जरिये भी फैलती है। यह जानकारी पिछले दो दिनों से यहां परिषद की वित्त पोषित परियोजनाओं की मूल्यांकन बैठक में दी गई।

बता दें कि अलीगढ़ मेडिकल कालेज में भर्ती जापानी बुखार से पीड़ित बच्चे की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। स्वास्थ्य विभाग की टीमें जांच के लिए फिर से एक बार गांव में पहुंच गई हैं। जिले के दहगवां ब्लॉक क्षेत्र के गांव भवानीपुर खैरू निवासी शमशाद के छह महीने के बेटा अदनान की जापानी इंसेफलाइटिस से मौत हुई है।

23 जुलाई को बच्चे की हालत बिगड़ने के बाद परिवार ने झोलाछाप से पहले इलाज लिया। इसके बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ तो बच्चे को बदायूं शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां से बच्चे को उपचार में राहत न मिलने पर अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया गया।

वहीं शुक्रवार को हुई बैठक में एक और उपलब्धि सामने आयी। आम, बेल तथा अमरूद के बगीचों में फलों की तुड़ाई का एक हार्वेस्टर का निर्माण करवाया गया है। इससे एक घंटे में 600 से 800 फलों की तुड़ाई की जा सकती है। बैठक में यह जानकारी भी दी गई की काला नमक चावल की ऐसी प्रजातियों के विकास का कार्य करवाया जा रहा है

जो कम अवधि में अधिक उत्पादन देने वाली हों और उनमें काला नमक चावल के बराबर सुगंध एवं गुणवत्ता मौजूद हो। कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डा. संजय सिंह के नेतृत्व में हुई इस बैठक में परिषद द्वारा वित्त पोषित 29 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया।

यह पढ़े: हेलो, डीएम बोल रहा हूं, क्या आपकी शिकायत वाकई दूर हुई? फोन कर लिए फीडबैक