101 साल पहले आज ही के दिन खोजा गया था ‘प्लूटो’ ग्रह, जानें क्यों कहा गया बौना

आज से 101 साल पहले 18 फरवरी के ही दिन अमेरिकी वैज्ञानिक क्लाइड टॉमबा ने ‘प्लूटो’ नाम के ग्रह की खोज की थी। जिसे दुनिया का सबसे बौना ग्रह माना गया। खोज के बाद इसे हमारे सौरमंडल का नौवां ग्रह मान लिया गया था, लेकिन बाद में इसे ग्रहों के परिवार से बाहर कर दिया गया। इस ग्रह के नाम से जुड़ा एक किस्सा है जिसे जानकर हर किसी को आश्चर्य होगा। दरअसल, इस ग्रह का नाम सुझाव मांगने पर 11वीं की लड़की ने इसे प्लूटो नाम दिया था।

248 साल में काटता है सूर्य का चक्र

लड़की का कहना था कि रोम में अँधेरे के देवता को ‘प्लूटो’ कहा जाता हैं और इस ग्रह पर भी हमेशा अंधेरा रहता हैं। इसलिए इसका नाम भी प्लूटो होना चाहिए। खोजकर्ताओं के अनुसार प्लूटो को सूर्य का एक चक्कर लगाने में 248 साल का समय लग जाता हैं। जिस तरह से पृथ्वी पर एक दिन 24 घंटे का होता है, उसी तरह प्लूटों में यह 24 घंटे 153.36 घंटों के बराबर हैं। ऐसे में यहां दिन रात के बदलने में करीब 6 दिन का समय लग जाता हैं।

ग्रेविटी है बहुत कम

प्लूटो पर पृथ्वी की ग्रेविटी का 7 फीसदी गुरुत्वाकर्षण है और यहां तापमान भी भारत से बहुत अलग हैं। जोकि इंसान के रहने के लिहाज से बिल्कुल ठीक नहीं है। कई खगोलविदों ने प्लूटो को ग्रह मानने से इंकार कर दिया था, उनका कहना था कि यह कुइपर बेल्ड’ के पिंडों में से एक हो सकता है। इसलिए वर्ष 2006 में आईएयू के प्रस्ताव के मुताबिक अब सिर्फ़ आठ ग्रह बच गए हैं, बुध, शुक्र, पृथ्वी, वृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेप्च्यून।

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