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प्रयागराज से लेकर इलाहाबाद तक का सफर, जानिए कैसे बदला नाम

इलाहबाद का नाम बदलकर प्रयागराज रखने को लेकर बहस जारी है, लेकिन, अगर देखें तो पुराणों में भी इलाहबाद को प्रयागराज के नाम से ही संबोधित किया गया है। यानि इलाहबाद कहीं भी हिंदू पुराणाों में नजर नहीं आता है, सिर्फ प्रयागराज नाम से ही इस पवित्र तीर्थ नगरी का वर्णन होता आया है। रामचरित मानस में इसे प्रयागराज ही कहा गया है। संगम के जल से प्राचीन काल में राजाओं का अभिषेक होता था।

इस बात का उल्लेख वाल्मीकि रामायण में है। वन जाते समय श्रीराम प्रयाग में भारद्वाज ऋषि के आश्रम पर होते हुए गए थे। भगवान श्रीराम जब श्रृंग्वेरपुर पहुंचे तो वहां प्रयागराज का ही जिक्र आया। सबसे प्राचीन एवं प्रामाणिक पुराण मत्स्य पुराण में इस तीर्थ के महात्म्य का वर्णन है। उसमें लिखा है कि प्रयाग प्रजापति का क्षेत्र है जहां गंगा और यमुना बहती हैं। इसलिए उसका नाम प्रयागराज पड़ा था।

अकबरनामा और आईने अकबरी व अन्य मुगलकालीन ऐतिहासिक पुस्तकों से ज्ञात होता है कि अकबर ने सन 1574 के आसपास प्रयागराज में किले की नींव रखी। उसने यहां नया नगर बसाया जिसका नाम उसने इलाहाबाद रखा। उसके पहले तक इसे प्रयागराज के ही नाम से जाना जाता था।

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