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अनूठा और ऐतिहासिक होगा प्रयागराज कुम्भ 2019, सरकार ने उठाए यह कदम

पूरे विश्व के सबसे बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाला कुम्भ मेला में इस बार ऐसी चीजें देखने को मिलेंगी, जो श्रद्धालुओं को एक अलग ही अनुभव प्रदान करेंगी। कुम्भ मेले से जुड़ी तैयारियों के अनुभव उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री श्रीकान्त शर्मा ने पत्रकारों से साझा किये। राजस्थान की राजधानी जयपुर पहुंचे श्रीकान्त शर्मा ने प्रयागराज कुम्भ 2019 पर एक किताब का भी विमोचन किया। कुम्भ मेला 15 जनवरी, 2019 से प्रयागराज में प्रारम्भ हो रहा है। इस बार कुम्भ भव्य स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार केंद्र के सहयोग से यह आयोजन कर रही है। इस अवसर पर प्रयागराज कुम्भ-2019 का नया ‘लोगो’ भी लॉन्च किया गया।

मेले में प्रथम बार 10,000 व्यक्तियों की क्षमता युक्त गंगा पण्डाल, 2000 क्षमता का एक प्रवचन पण्डाल, 1000 क्षमता के 4 सांस्कृतिक पण्डाल स्थापित किये जा रहे हैं, जिनमें सांस्कृतिक कार्यक्रम लगातार होते रहेंगे। 20,000 आम श्रद्धालुओं के लिए प्रथम बार यात्री निवास आदि की व्यवस्था भी की जा रही है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की सरकार में मंत्री श्रीकान्त शर्मा ने कहा कि मैं यहां राजस्थान की सरकार और नागरिकों को प्रयागराज कुम्भ में आने के लिए न्यौता देने आया हूं। श्रीकान्त ने मीडिया द्वारा सरकार और प्रतिनिधियों और नागरिकों से प्रयागराज कुम्भ में आने का आग्रह किया। गौरतलब है कि हाल ही में इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया गया है।

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श्रीकान्त शर्मा ने कहा, इस कुम्भ में 5 हजार से ज्यादा प्रवासी भारतीय भी आएंगे। सम्पूर्ण विश्व में मानवता के इस विशालतम समागम में भारत के 6 लाख से अधिक गावों के लोगों सहित विश्व से आने वाले श्रद्धालु भी इसमें प्रतिभाग करेंगे।

सरकार के प्रयासों एवं भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के सहयोग से साढ़े चार सौ वर्षों में प्रथम बार कुम्भ में आने वाले श्रद्धालुओं को ‘अक्षय वट’ और ‘सरस्वती कूप’ के दर्शन का अवसर सुलभ होगा। कुम्भ का आयोजन त्रिवेणी संगम पर होता है किन्तु इसका सम्बन्ध सम्पूर्ण प्रयागराज क्षेत्र से है।

राज्य सरकार द्वारा इस आयोजन की प्रकृति के अनुरूप प्रयागराज कुम्भ-2019 का नया ‘लोगो’ भी लॉन्च किया जा चुका है। राज्य सरकार द्वारा इस कुम्भ में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधा तथा इस आयोजन में उनके सुखद अनुभव को विशेष प्राथमिकता दी गयी है।

प्रयागराज में हर छ: वर्ष बाद कुम्भ का आयोजन होता है और हर वर्ष माघ मेला लगता है। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा प्रयागराज मेला प्राधिकरण का गठन किया गया है

राज्य सरकार ने कुम्भ के सुचारु संचालन के दृष्टिगत प्रयागराज में प्रथम बार 64 से अधिक यातायात चौराहों तथा मेले को जोडऩे वाली 264 सडक़ों का वृहद स्तर पर चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण पिछले डेढ़ वर्षों में किया है। कुम्भ के दृष्टिगत प्रयागराज नगर के चिकित्सालयों में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता बढ़ायी गयी है तथा चिकित्सा सुविधाओं का विकास कर नये संयंत्रों की स्थापना की गयी है।

15 जनवरी, 2019 से प्रयागराज में शुरू हो रहा यह कुम्भ अब तक का सबसे अनूठा कुम्भ होगा। पूरी दुनिया इसमें हिस्सेदारी कर रही है। लगभग 71 देशों के राजदूत इसकी तैयारी देख चुके हैं। अपने-अपने देशों के राष्ट्रध्वज उन्होंने त्रिवेणी तट पर कुम्भ मेले में लगाये हैं। जनवरी में प्रवासी भारतीय दिवस का सम्मेलन वाराणसी में है। फरवरी में 192 देशों के प्रतिनिधि इस कुम्भ में आयेंगे।

पहली बार इस पूरे कुम्भ को इण्टीग्रेटेड कण्ट्रोल एवं कमाण्ड सेण्टर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा गया है। इस सिस्टम से प्रयागराज नगर के साथ-साथ कुम्भ नगर के यातायात और मेले में आने वाली भीड़ को भी नियंत्रित और सुरक्षित रखा जा सकेगा। इससे यहाँ की कानून व्यवस्था को नियंत्रित करने में बड़ी मदद मिलेगी। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में केवल सुरक्षा ही नहीं, शहर की सफाई व्यवस्था पर भी नजर रहेगी।


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