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महाराष्‍ट्र में लागू हुआ राष्ट्रपति शासन, देवेन्‍द्र फडणवीस इसे बताया दुर्भाग्‍यपूर्ण

सरकार नहीं बनने की स्थिति में महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है। राज्‍य विधानसभा निलम्बित रखी गयी है। राज्‍यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी ने केन्‍द्र को भेजी रिपोर्ट में कहा था कि राज्‍य में कोई भी दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने कल राष्‍ट्रपति को भेजी राज्‍यपाल की रिपोर्ट पर विचार किया।

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि सरकार बनाने का उनकी पार्टी का दावा अभी भी कायम है और भिन्न विचारधारा के मुद्दे पर जो दल है उनके साथ, वह सरकार बनाना चाहते हैं। ठाकरे ने यह भी कहा कि सोमवार से उनकी शरद पवार और कांग्रेस से बातचीत जारी है।

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NCP और कांग्रेस के वार्तालाप में शरद पवार ने कहा कि उनके गठबंधन के दलों के बीच सभी बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट होने के बाद शिवसेना से भी बातचीत की जाएगी और उसके बाद ही सरकार बनाने के बारे में आगे कोई फैसला लिया जाएगा। पवार ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी किसी भी सूरत में महाराष्ट्र में दोबारा चुनाव नहीं होने देंगे।

BJP ने शिवसेना के अडि‍यल रवैये को राज्‍य में राष्‍ट्रपति शासन लागू किए जाने के लिए जिम्‍मेदार ठहराया है। वरिष्‍ठ भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने मुम्‍बईै में भाजपा कोर समिति की बैठक के बाद कहा कि राष्‍ट्रपति शासन राज्‍य के लोगों के जनादेश का अपमान है। उन्‍होंने कहा कि स्‍पष्‍ट जनादेश मिलने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने सरकार बनाने के लिए अपने पूर्व सहयोगी शिवसेना के समान गठबंधन से इतर अन्‍य दलों का समर्थन नहीं तलाशा। भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता देवेन्‍द्र फडणवीस ने भी राज्‍य में राष्‍ट्रपति शासन लागू किए जाने को दुर्भाग्‍यपूर्ण बताया। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि राज्‍य को जल्‍दी ही एक स्थिर सरकार मिलेगी।

288 सदस्‍यों की विधानसभा के लिए पिछले महीने हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 105, शिवसेना को 56, राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं। सत्‍ता भागीदारी और मुख्‍यमंत्री पद पर सहमति नहीं बनने के कारण बहुमत पाने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी-शिवसेना गठबंधन से शिवसेना अलग हो गई थी।

इसके बाद शिवसेना ने राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के समर्थन से गैर भाजपा सरकार बनाने का प्रयास किया। उसने सरकार बनाने का समर्थन पत्र सौंपे जाने के लिए तीन दिन की अवधि नहीं देने के राज्‍यपाल के फैसले को उच्‍चतम न्‍यायालय में चुनौती देने का भी प्रयास किया, लेकिन न्‍यायालय से शीघ्र सुनवाई की स्‍वीकृति नहीं मिली।

कांग्रेस प्रवक्‍ता रणदीप सुरजेवाला ने राज्‍यपाल और केन्‍द्र पर संवैधानिक व्‍यवस्‍था के अनुसार नहीं चलने का आरोप लगाया।

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