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राज्याभिषेक के एक दिन पहले राजा राम को मिला था 14 वर्ष का वनवास

दशरथ अपने सर्वगुणसम्पन्न पुत्र को राज्य के समस्त अधिकार सौंप देना चाहते थे । उन्होंने सभी मंत्री, बड़ों से सलाह कर राम को शीघ्र युवराज का पद देने का निश्चय कर लिया ।

 

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राज्याभिषेक के लिए चैत्र मास में अयोध्या आने का निमन्त्रण सभी मित्र राजाओं को भिजवाया गया | राम के अभिषेक की तैयारी जोरो-शोरो से हो रही थी राजमहल में उसी क्षण से मंगलगान और दान-पुण्य आदि होने लगे । बधाई गीत बजने लगे|

 

तभी मन्थरा जो कैकेयी की एक कुबड़ी-कुरूपा दासी थी । राम के राज्याभिषेक की बात सुनते ही मन्थरा का हृदय बैठ गया । वह तुरन्त महल की ओर दौड़ी । और वेदना पूर्ण स्वर में कैकेयी से बोली–अरी मूढ़ रानी! क्या पगली हो गई है तू? घोर अनर्थ होने वाला है और एक तू है साज-श्रृंगार कर रही है। तुझे किस बात की ख़ुशी हो रही है रानी कैकई ?

कैकेयी ने चौंककर पूछा–मन्थरे, कुशल तो है तू ! इस तरह व्याकुल क्यों है तू ?

मन्थरा बोली–रानी! तुमने कुछ सुना कि नहीं? तुम्हारे सुख-सौभाग्य का अन्त होने वाला है । महाराज कल ही राम का अभिषेक करेंगे । भरत को यहां से दूर भेजकर वे कौशल्या के बेटे को गद्दी देने जा रहे हैं ।

 

 

कैकेयी ने कहा तो इसमें सोचने वाली कोनसी बात है? ये तो ख़ुशी की बात है | मेरा पुत्र ही तो राजगद्दी पर बैठ रहा है| बता, मैं तुझे क्या पुरस्कार दूँ? क्या सचमुच कल राम का अभिषेक होगा? मेरे लिए इससे बढ़कर प्रसन्नता की बात और क्या होगी? मैं राम और भरत में कोई अन्तर नहीं मानती ।

 

मन्थरा रोषपूर्वक बोली–रानी! तुम्हारी तो बुद्धि ही मारी गई है, लाख समझाने पर कैकई मंथरा की बातों में आ जाती है और दशरथ से अपने 2 वर मांगने को कहा|

रानी कैकई ने राजा दशरथ से अपने 2 वर मांगे | पहला वर था – भरत को राज्य, दूसरा- राम को 14 वर्ष का वनवास |

यह सुनकर रजा का ह्रदय विदीर्ण हो गया | रजा ने कहा रानी भरत को राज्य तो ठीक है लेकिन राम को वनवास क्यों? लेकिन रानी ने एक न सुनी और लक्ष्मण, सीता  सहित राम वनवास चले गए |

पीछे से दशरथ राम के विरह में स्वर्ग सिधार गये | (चूकि राजा दशरथ को श्रवण कुमार के माता-पिता का श्राप भी था की वह पुत्र वियोग से मरेंगे ) भरत जब ननिहाल से वापस आये माँ कैकई को बहुत बुरा-भला कहा | माँ कौशल्या से कहा की हाय माता मुझे आपने अपनी कोख से पैदा क्यों नही किया| मुझे कैकई पुत्र होने का अभिशाप क्यों मिला?

भरत ने राजा दशरथ का दाह-संस्कार किया व राम को वापस लेने वन पहुचें| लेकिन राम आने से मन कर देते है तब भरत राम की चरण पादुका लेकर अयोध्या का ध्यान रखते है |

 

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