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जजों की बात पर गौर किया जाना चाहिए: राहुल गांधी

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जजों द्वारा सीजेआई के कामकाज पर सवाल उठाने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया। राहुल गांधी ने प्रेसवार्ता में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के चारों वरिष्ठ जजों की बातों पर गौर करना चाहिए। साथ ही राहुल गांधी ने जस्टिस लोया की मौत की जांच की मांग भी उठाई। सीबीआई के स्पशेल जस्टिस बीएच लोया की 1 दिसंबर, 2014 को नागपुर में मौत हो गई थी। जस्टिस लोया सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस की सुनवाई कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस और तुलसी प्रजापति एनकाउंटर केस को एक साथ जोड़ते हुए महाराष्ट्र में ट्रांसफर कर दिया था। केस को जज लोया की अदालत में शिफ्ट कर दिया गया। लोया से पहले जज जेटी उत्पत केस को देख रहे थे।

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राहुल गांधी ने कहा कि जजों को अगर जजों को किसी प्रकार की शिकायत है तो उस पर ध्यान देना चाहिए और उनकी शिकायत को दूर करते हुए मामले पर ध्यान देना चाहिए। भारतीय न्यायिक व्यवस्था में पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। राहुल गांधी ने इसे अभूतपूर्व घटना बताया। जजों की प्रेस कॉन्फ्रें स के बाद राहुल गांधी ने अपने निवास पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की।

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इस बैठक में कांग्रेस के दिग्गज नेता सलमान खुर्शीद, मनीष तिवारी, कपिल सिब्बल, विवेक तन्खा और पी. चिदंबरम समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। गौरतलब है कि प्रेस कॉन्फ्रें स कर सीजेआई पर सवाल उठाने वाले चारों जजों जज लोया का मामला भी उठाया है।

देश की शीर्ष अदालत यानि सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस वार्ता बुलाकर सीजेआई यानि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए हैं। प्रेस वार्ता कर आरोप लगाने वाले चारों जज जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ हैं।

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मीडिया को संबोधित करते हुए जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि हम देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर हैं। इसके तहत हमारी राष्ट्र और न्यायपालिका के प्रति जिम्मेदारी बनती है। हमने कुछ बातें चीफ जस्टिस के समक्ष रखीं थीं लेकिन, उन्होंने हमारी कोई बात नहीं सुनी। इसलिए हमें सार्वजानिक तौर पर यह कदम उठाना पड़ा। उन्होंने इस मामले में एक खास मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि हमने सीजेआई को बहुत समझाने की कोशिश की हम एक चीज को लेकर बदलाव चाहते हैं। लेकिन, वह नहीं माने इसलिए हमें सार्वजानिक तौर पर देश के सामने यह बात रखनी पड़ी।

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