रणजी ट्रॉफी 2022 फाइनल: मध्य प्रदेश और मुंबई के बीच खिताबी भिड़ंत, मुंबई की नजरें 42वीं बार चैंपियन बनने पर

मुंबई की मजबूत टीम मध्य प्रदेश के खिलाफ बुधवार से शुरू होने वाले रणजी ट्राफी फाइनल में 42वां खिताब हासिल करने दृढ़ इरादों के साथ मैदान पर उतरेगी। यह असल में मुंबई के योद्धाओं और मध्य प्रदेश के रणबांकुरों के बीच मुकाबला है जिसमें कोई भी टीम किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहेगी।

मध्य प्रदेश के मुख्य कोच चंद्रकांत पंडित ने अपनी टीम को किसी चैंपियनशिप से कम पर समझौता नहीं करना सिखाया है, लेकिन सत्र के आखिर में अमोल मजूमदार की कोचिंग में खेल रहे मुंबई के खिलाड़ियों ने अधिक दबदबे वाला प्रदर्शन किया है। कागजों पर मुंबई की टीम खिताब की प्रबल दावेदार नजर आती है।

सरफराज खान ने केवल पांच मैचों में 800 से अधिक रन बनाकर अपने खेल को पूरी तरह से अलग स्तर पर पहुंचा दिया है। यशस्वी जायसवाल ऐसे युवा खिलाड़ी हैं जो लंबी अवधि के प्रारूप को लेकर उतने ही गंभीर हैं जितना कि वह राजस्थान रॉयल्स की तरफ से आईपीएल में खेलने को लेकर हैं।

क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल की चार पारियों में तीन शतक से रनों के लिये उनकी भूख का पता चलता है।पृथ्वी शॉ किसी भी गेंदबाजी आक्रमण पर हावी होने के लिये वीरेंद्र सहवाग की तरह रणनीति अपनाने वाले बल्लेबाज हैं। इनके अलावा मुंबई के पास अरमान जाफर, सुवेद पारकर और हार्दिक तमोर हैं जो मौके का फायदा उठाना जानते हैं।

बेंगलुरु में होने वाले रणजी ट्रॉफी फाइनल मैच से पहले मुंबई के एक पूर्व खिलाड़ी ने चुटकी लेते हुए कहा, “कोई भी जीते, शिवाजी पार्क विजेता होगा। दरअसल, वह शुरुआती दिनों का जिक्र कर रहे थे कि कैसे मुंबई के दो बेहतरीन खिलाड़ी अमोल मुजुमदार और चंद्रकांत पंडित, जिन्होंने दिवंगत रमाकांत आचरेकर के प्रसिद्ध नर्सरी में अपने कौशल को निखारा। वे दोनों अब कोच के रूप में आमने-सामने हैं।

जैसा कि बुधवार से बेंगलुरु में रणजी ट्रॉफी फाइनल में मुंबई और मध्य प्रदेश का मुकाबला होने वाला है। मजुमदार और पंडित केवल विपक्षी टीमों के दो कोच नहीं हैं। मुजुमदार ने पंडित के नेतृत्व में अपने करियर के आखिरी दिनों में बेहतरीन प्रदर्शन किया था। 2003-04 में जब मुजुमदार क्रिकेट छोड़ना चाहते थे, उस समय पंडित के नेतृत्व में अपने सबसे सफल सीजन में से एक का आनंद लिया, और उस सीजन मुंबई के सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे।

दोनों एक सरल कोचिंग फिलॉसफी को मानते हैं

यह खिलाड़ियों के संबंध में है और एक खिताब जीतने के अलावा कुछ भी सफलता नहीं है। यह ऐसा मनोभाव है जो मुंबई के अधिकांश खिलाड़ियों में अंतर्निहित हो जाती है जब वे खेलते हैं। पंडित कोच के रूप में छह खिताबी जीत का हिस्सा रहे हैं; मुजुमदार अपने पहले सीजन में मुंबई को अपने नेतृत्व में पहला खिताब और कुल 42वां खिताब दिलाने की कोशिश करेंगे।

धवल कुलकर्णी को छोड़कर, जो 2015-16 में मुंबई के पिछली खिताबी जीत का हिस्सा थे, मुंबई के अन्य खिलाड़ियों में से कोई भी रणजी ट्रॉफी नहीं जीता है। मध्य प्रदेश के खेमे में भी पंडित को छोड़कर, जो कप्तान थे, जब मध्य प्रदेश ने आखिरी बार फाइनल में जगह बनाई थी, सभी खिलाड़ी पहली बार फाइनल खेलेंगे।

मुंबई के पास प्रतिभाशाली युवा बल्लेबाजी क्रम है, जिसकी कमान पृथ्वी शॉ के हाथों में है, जो इस सीजन शतक नहीं बनाने वाले बड़े नामों में से एकमात्र हैं। यशस्वी जायसवाल ने लगातार तीन शतक जड़े हैं। सुवेद पारकर ने डेब्यू पर ही दोहरा शतक जड़ा और अरमान जाफर और सरफराज खान सेमीफाइनल में बड़ा योगदान देकर आ रहे हैं

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