संकट के बीच शिवसेना को मिला TMC का साथ, गुवाहाटी में होटल के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन

महाराष्ट्र की राजनीति में सियासी बवाल शिवसेना (Shivsena) के लिए मुसीबत बन गया है. पार्टी के लगभग दो तिहाई विधायक दिग्गज नेता एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के साथ असम के गुवाहाटी पहुंच गए हैं. ऐसे में महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी सरकार (MVA) अल्पमत में हैं. शिवसेना की एक मुश्किल घड़ी में उसे टीएमसी (TMC) का साथ मिला है क्योंकि टीएमसी के नेता और कार्यकर्ता इस मामले में असम सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने लगे हैं.

दरअसल, महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट में शिवसेना का समर्थन करने के लिए टीएमसी की असम इकाई के कार्यकर्ताओं ने गुवाहाटी में रैडिसन ब्लू होटल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया है. इसी होटल में शिवसेना के एकनाथ शिंदे सहित महाराष्ट्र के बागी विधायक ठहरे हुए हैं. होटल के बाहर धरने की अगुआई टीएमसी के प्रदेश अध्यक्ष रिपुन बोरा (Ripun Vohra) ने की थी.

होटल के बाहर प्रदर्शन
ANI की रिपोर्ट अनुसार गुवाहाटी में रैडिसन ब्लू होटल के बाहर प्रदर्शन कर रहे टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस हिरासत में ले रही है. टीएमसी के एक कार्यकर्ता ने कहा कि असम में लगभग 50 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं लेकिन असम के सीएम महाराष्ट्र की सरकार को गिराने में व्यस्त हैं. असम के मंत्री अशोक सिंघल एकनाथ शिंदे सहित महाराष्ट्र के बागी विधायकों से मिलने रैडिसन ब्लू होटल पहुंचे.

बागियों से हुई मुलाकात
महाराष्ट्र के बागी विधायक पूर्व गृह राज्य मंत्री और शिवसेना नेता दीपक केसरकर से भी मिले. शिवसेना के दो और विधायक सदा सर्वंकर और मंगेश कुडलकर के कल रात मुंबई छोड़ने की सूचना मिली थी. उन्हें भी आज एकनाथ शिंदे के साथ गुवाहाटी में देखा गया. अब गुवाहाटी के रैडिसन ब्लू होटल में एकनाथ शिंदे के साथ महाराष्ट्र के कुल 42 विधायक मौजूद हैं. इसमें शिवसेना के 34 और 8 निर्दलीय विधायक शामिल हैं.

उद्धव ठाकरे के साथ राउत
विधायकों के बागी होने के मामले पर शिवसेना के नेता संजय राउत ने एक बयान में कहा, ‘ईडी के दबाव में पार्टी छोड़ने वाले सच्चे बालासाहेब भक्त नहीं हैं. हम सच्चे बालासाहेब भक्त हैं. ईडी का दबाव है लेकिन उद्धव ठाकरे के साथ खड़े रहेंगे.’ संजय राउत ने कहा कि वे शिवसेना के किसी खेमे की बात नहीं करेंगे. केवल अपनी पार्टी की बात करेंगे. शिवसेना आज भी मजबूत है. करीब 20 विधायक हमारे संपर्क में हैं. जब वे मुंबई आएंगे तो आपको पता चलेगा कि किन परिस्थितियों में इन विधायकों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया.

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