मनुष्य के जीवन में संवेदनाएं जरूरी – शिवराज

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कहा कि मनुष्य के जीवन में संवेदनाएं जरूरी हैं और इनके बगैर सेवा भाव उत्पन्न नहीं होता है। संवेदनाएं और सेवा भारतीय संस्कृति का भी मूल आधार है। चौहान यहां स्वदेश ग्वालियर समूह की 50 वर्षों की स्वर्णिम यात्रा के अवसर पर ‘भारतीय राजनीति में सेवा, संवेदना और संस्कृति’ विषय पर आयोजित विमर्श को संबोधित कर रहे थे।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महारा, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिवप्रकाश, मध्य स्वदेश के प्रबंध संचालक यशवर्धन जैन और समूह संपादक अतुल तारे भी मौजूद थे। चौहान ने कहा कि संवेदनाओं के चलते ही ‘लाड़ली लक्ष्मी योजना’ उपजी है। संवेदना के बिना सेवा का भाव पैदा नहीं हो सकता है। संवेदना और सेवा भारत के मूल में है। दूसरों की सेवा का भाव संवेदना से ही पैदा होता है।

इसके साथ ही उन्होंने स्वदेश समाचारपत्र की यात्रा को वैचारिक अनुष्ठान और मूल्य आधारित पत्रकारिता बताया। इस कार्यक्रम में अतिथियों ने मुख्यमंत्री श्री चौहान के व्यक्तित्व और कृतित्व पर केन्द्रित ग्रंथ “विलक्षण जननायक” का विमोचन भी किया। वहीं चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि पत्रकारिता के मौजूदा दौर में स्वदेश की मूल्य आधारित पत्रकारिता निरंतर जारी है।

चौहान ने कहा कि बचपन में उन्हें एक कहानी के माध्यम से भगवान की पूजा करने के भाव का प्रकटीकरण हुआ। रामायण और गीता पढ़ते-पढ़ते समाज सेवा के लिए भाव पैदा हुआ। उन्होंने महिलाओं तथा बेटियों के साथ भेदभाव की घटनाओं का स्मरण करते हुए कहा कि गरीबों और श्रमिकों को उनका पूरा परिश्रम दिलाने का भाव मन में उत्पन्न हुआ। गाँव की बेटियों के खिलाफ अन्याय और महिलाओं पर अत्याचार आंखों से देखकर मन में बेटा-बेटियों में भेद न करने की संवेदना पैदा हुई। इसके बाद जब वे मुख्यमंत्री के रूप में सत्ता में आए, तो मुख्यमंत्री कन्यादान योजना और लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजनाएं शुरू की गयीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके अलावा महिलाओं को स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण और पुलिस भर्ती में 30 प्रतिशत आरक्षण दिया गया।

महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि सेवा, संवेदना और संस्कृति एक दूसरे के अभिन्न अंग हैं। सेवा से ही ईश्वर की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति स्वार्थ और लालसा से दूर होता है, वही सेवा कर सकता है। सेवा ईश्वरीय कार्य है। उन्होंने कहा कि सबके सुख के लिए कार्य करना हमारा भाव होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री चौहान की ‘सेवा और संवेदना’ के कई उदाहरण दिए और कहा कि वे मूल्य, परम्पराओं और संस्कृति के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। वे एक अच्छे विचारक, चिंतक और प्रशासक हैं।

उन्होंने कहा कि अब भारत का युग आ गया है। राम मंदिर का कार्य राष्ट्र निर्माण का कार्य है। स्वामी अवधेशानंद ने कहा कि भारत में जहाँ काशी और अयोध्या को नया स्वरूप दिया जा रहा है, वहीं मध्यप्रदेश में महाकालेश्वर और उज्जैन जैसे धार्मिक स्थलों का विकास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज विमोचित पुस्तक संस्कृति के शंखनाद का संदेश देगी।

वरिष्ठ भाजपा नेता शिवप्रकाश ने कहा कि हम सबके लिए राजनीति में सेवा, संवेदना और संस्कृति होना आनंददायी है। वेदना को समझकर अपने अंदर अनुभूत करना संवेदना है। संवेदना की अनुभूति राजनीति में सक्रियता को जन्म देती है। गरीबों की सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है।

मध्य स्वदेश के समूह संपादक तारे ने स्वदेश ग्वालियर समूह की अभी तक की यात्रा पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सेवा, संवेदना और संस्कृति राजनीति के मूल्य हैं। समाज को दिशा देने में इनकी अहम भूमिका है। ‘विलक्षण जननायक’ पुस्तक समाज के लिए उपयोगी साबित होगी।

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