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भारत में प्रदूषण की गंभीर स्थिति: कितनी तैयार है भारतीय सरकार और आम जनता?

भारत में प्रदूषण की स्थिति सबसे गंभीर है। प्रदूषण की वजह से लाखों लोगों के स्वास्थ्य में असर हो रहा है और लोग इससे मर तक रहे है। फिर भी यह मुद्दा ना ही तो मीडिया के लिए महत्वपूर्ण है, ना सरकार के लिए। अपने देश के सुरक्षित भविष्य की कल्पना के लिए हमें अभी से ही प्रदूषण को लेकर जागरुक हो जाना चाहिए।

हमारे देश में विपक्ष के नेता, मीडिया तथा सैंकड़ों की संख्या में लोग हमेशा दूसरे मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरते रहे हैं। पर कभी भी किसी ने भी पर्यावरण प्रदूषण के मुद्दे को लेकर सड़कों पर  प्रदर्शन नहीं किया है। सड़कों पर प्रदर्शन करना तो दूर, मीडिया, नेता, सरकार और आम लोग, कोई भी इस बारे में गंभीरता से सोचना तक नहीं चाहता।

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भारत को छोड़कर विश्व के अन्य देश अपने देश में जलवायु परिवर्तन को लेकर सड़क पर उतर जाते हैं। अभी हाल ही में स्पेन, न्यूजीलैंड और नीदरलैंड की जनसंख्या के बहुत बड़े हिस्से ने सड़क पर  प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन को लेकर प्रदर्शन किया। न्यूजीलैंड के लोगों ने वहां के सांसद को चिट्ठी लिखकर उनसे देश में क्लाइंट इमरजेंसी घोषित करने की मांग की, साथी जलवायु परिवर्तन को लेकर विशेष काउंसिल बनाने की भी मांग की गई।

Pollution from industrilization

यहां पर मुद्दा किसी भी बात को लेकर सड़कों पर उतरने से नहीं है। खास बात है कि हमें अपनी जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण प्रदूषण के मामलों को लेकर गंभीर होना होगा। यह सिर्फ सरकार, मीडिया या नेताओं की जिम्मेदारी नहीं है। यह एक आम आदमी की भी जिम्मेदारी है कि हम अपने आसपास के पर्यावरण के लिए जागरूक हो। क्योंकि यही पर्यावरण हमें सांस लेने जैसी बेसिक क्रिया से लेकर जीने के लिए भी सक्षम बनाता है।

भारत अपनी औद्योगिक नीति के लिए विशेष रूप से जागरूक हैं। भारत में औद्योगीकरण को बढ़ावा मिल रहा है। पर इसे औद्योगिकरण ने भारत को विश्व में चीन के बाद दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्सर्जित करने वाले देशों की सूची में लाकर खड़ा कर दिया है। औद्योगिकरण सही है, विकास जरूरी है पर इसके साथ-साथ हमें इन कार्बन डाइऑक्साइड को वापस से अवशोषित करने के बारे में सोचना होगा। ऐसी तकनीक और नीतियां विकसित करनी होगी जिनसे विकास तो हो ही साथ ही पर्यावरण को नुकसान भी ना हो।

यहां पर मुद्दा पर्यावरण या जलवायु परिवर्तन को लेकर एक दूसरे पर टीका-टिप्पणी करना, सड़कों पर प्रदर्शन करना या वाद-विवाद करना नहीं है। बल्कि जागरूक होना है। जलवायु परिवर्तन ना सिर्फ भारत की बल्कि पूरे विश्व की समस्या है। प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने और पर्यावरण प्रदूषण के लिए गंभीर नीतियां बनाने की जरूरत है। विश्व के साथ-साथ भारत में भी इस मुद्दे को पर ध्यान देने की जरूरत है।

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