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हिमाचल में स्थित यह मंदिर कभी 1 स्तंभ पर घूमता था, अब है पुरातत्व विभाग के अधीन

शिवशक्ति देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश राज्य में चंबा क्षेत्र के भरमौर में स्थित है जो एक प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर को पहाड़ियों के तीर्थों में से एक माना जाता है। इस मंदिर के दर्शन करने के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं। शिवशक्ति देवी मंदिर समुद्र तल से 6,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। छतराड़ी में स्थित मां शिव शक्ति का मंदिर ऐसा है, जो कभी एक स्तंभ पर घूमता था। मंदिर से जुड़ा एक रोचक तथ्य यह है कि यह संभवता देश का ऐसा पहला मंदिर है, जिसका प्रवेश द्वार पश्चिम दिशा है। जिला मुख्यालय चंबा से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित छतराड़ी गांव स्थित प्रसिद्व शिव शक्ति मंदिर से जुड़ी यह ऐतिहासिक घटना है। मौजूदा समय में यह मंदिर भारत सरकार के पुरातत्व विभाग के अधीन है और इसकी देखरेख का जिम्मा भी विभाग संभाले हुए है। भरमौर के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक होने की वजह से यह स्थान एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है।

छतराड़ी गांव का शिव शक्ति मंदिर का निर्माण लकड़ी से हुआ है। मंदिर का शायद ही कोई भाग ऐसा हो, जहां पर पत्थर को प्रयोग में लाया गया है। मंदिर में लकड़ी पर की गई नक्काशी अद्भुत कारीगरी का एक बेहतरीन नमूना पेश करती है। इसके अलावा मंदिर के भीतर दीवारों पर बनाई गई पेंटिंग भी मंदिर में आर्कषण का केंद्र रहती है।

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इस मंदिर के अंदर मौजूद अन्य मूर्तियों में छह मुखी कार्तिकेय, चार भुजाओं वाले ब्रह्मा, तीन मुखी विष्णु, शिव और दुर्गा शामिल हैं। इस मंदिर को छतरी का मंदिर भी कहा जाता है, क्योंकि यह हिमाचल में स्थित सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है। मंदिर की मूर्तियों में गुप्त काल के बाद के प्रभाव को देखा जा सकता है। इस मंदिर का निर्माण उस समय किया गया था जब यहाँ पर लक्ष्मण मंदिर का निर्माण किया गया था। इस मंदिर में देवदार स्तंभों को पर्ण आकृति और गमले से सजाया गया है। मंदिर के प्रवेश द्वार के ठीक ऊपर उड़ने वाली आकृतियों की एक सुंदर पंक्ति देखने को मिलेगी। दोनों तरफ चार आंकड़े मौजूद हैं और उनके हाथ में मुकुट है। इस मंदिर के अंदर की सजावट लक्ष्मण मंदिर की सजावट के समान है।

शिव शक्ति मंदिर छतराड़ी का निर्माण 780 ई पूर्व में गोगा नामक मिस्त्री ने किया था। कहा जाता है कि गोगा मिस्त्री का एक ही हाथ था और मां के आर्शीवाद से कारीगर ने मंदिर का निर्माण पूरा किया। कथा के अनुसार मंदिर का निर्माण पूरा होने पर कारीगर ने मोक्ष प्राप्ति की इच्छा जाहिर की थी और जैसे ही मंदिर निर्माण पूरा हुआ, मिस्त्री छत से गिर गया और उसकी मौके पर मौत हो गई। कारीगर के प्रतीक के रूप में एक चिड़िया के रूप की आकृति मंदिर में आज भी मौजूद है। कहा जाता है कि मां के आदेश पर गुगा कारीगर ने मंदिर का कार्य किया, लेकिन इस दौरान वह इसके द्वार को लेकर असमंजस में था। जिस पर शिव शक्ति मां ने गुगा को मंदिर घुमाने का आदेश दिया और कहा कि जहां यह रूक जाता है, उस तरफ इसका द्वार बना दो। कहा जाता है कि जिस वक्त मंदिर को घुमाया गया, तो यह पश्चिम दिशा में आकर रूका और देवी के आदेश के तहत इसका द्वार भी इसी दिशा में बना दिया गया।

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