जनजातीय वर्ग के लोगों को शिवराज ने समझाए पेसा के प्रावधान

खंडवा,(एजेंसी/वार्ता):मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज जनजातीय वर्ग के लोगों को मध्यप्रदेश पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियम 2022 (पेसा) के प्रावधान बारीकी से समझाए।

श्री चौहान जिले के पंधाना में आयोजित पेसा जागरुकता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि ये अधिनियम जनजातीय लोगों के सशक्तिकरण के लिए है। यह किसी के विरुद्ध नहीं है। यह प्रदेश के 89 जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में लागू होगा, शहरों में नहीं।

उन्होंने बताया कि 100 एकड़ तक की सिंचाई के जो तालाब होंगे उनका प्रबंधन ग्रामसभा करेगी। सरकार केवल उनकी मदद करेगी। पेसा एक्ट में यह व्यवस्था की गई है कि पटवारी और बीट गार्ड हर साल गांव में आकर ग्रामसभा के बीच खसरे, नक्शे और बी1 की नकल रखेंगे और यह बतायेंगे कि कौन सी जमीन किसके नाम है। विकास कार्यों के लिए अब जनजातीय वर्ग की जमीन उनकी अनुमति के बिना सरकार भी नहीं ले सकेगी।

श्री चौहान ने जनजातीय समुदाय के लोगों से कहा कि वे मध्यप्रदेश की धरती पर किसी भी हालत में धर्मांतरण का कुचक्र नहीं चलने देंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तालाबों का समस्त प्रबंध अब ग्रामसभाएं करेंगी, सरकार नहीं करेगी। तालाबों में होने वाले सिंघाड़ों या मछलियों पर भी अधिकार ग्राम सभाओं का ही होगा। यदि किसी ने छल-कपट या धोखे से जनजातीय वर्ग के व्यक्ति की जमीन अपने नाम करवाई है तो ग्रामसभा कब्जा वापिस दिलवाएगी। वनोपज पर अब सरकार का कोई अधिकार नहीं होगा। अचार की गुठली, महुए का फूल, महुए की गुल्ली, हर्रा, बहेड़ा, आंवला आदि को बीनने और बेचने का अधिकार जनता का ही होगा। इसका मूल्य भी जनता ही तय करेगी।

उन्होंने कहा कि अब अधिसूचित क्षेत्र में रेत, मिट्टी, पत्थर या कोई अन्य खदान का पट्टा बिना ग्रामसभा की अनुमति के सरकार नहीं दे सकेगी। अधिसूचित क्षेत्र की खदानों पर पहला अधिकार जनजातीय सोसायटी का, दूसरा अधिकार जनजातीय महिलाओं का और तीसरा जनजातीय पुरुषों का होगा। गांवों में होने वाले छोटे-मोटे झगड़ों को निपटाने के लिए ‘शांति और विवाद निवारण समिति’ बनेगी, जिसे ऐसे झगड़ों को निपटाने का अधिकार होगा। बड़े और गंभीर मामले ही थाने तक जायेंगे।

-एजेंसी/वार्ता

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