आयुर्वेद में भी सीताफल का मिलता है वर्णन, जानिए इस पौष्टिक फल के बारे में

सीताफल एक बहुत बड़ा ही स्वादिष्ट फल है। इस की खूबियों के बारे में आयुर्वेद में भी वर्णन देखने को मिलता है।मान्यता है कि सीता ने वनवास के समय श्रीराम को यह फल भेंट किया था।

काले घने बाल हर किसी को पसंद होते हैं। लेकिन दौड़ती-भागती लाइफ में अकसर लोग अपने बालों पर उतना ध्यान नहीं दे पाते हैं। ऐसे में बाल झड़ने और बालों के टूटने की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है।

सीताफल बालों के लिए भी बहुत लाभदायक साबित होता है। आयुर्वेद के अनुसार शीताफल शरीर को बहुत शीतलता पहुंचाता है। यह फल पित्तशामक, तृषाशामक, उल्टी रोकने वाला, पौष्टिक, तृप्तिकर्ता, कफ एवं वीर्यवर्धक, मांस एवं रक्त वर्धक, बलवर्धक, वात दोष शामक और हृदय के लिए पूरी तरह लाभदायी है।

सीताफल के पत्तों को पीस कर फोड़ों पर लगाने से वो बहुत ठीक हो जाते हैं।

सीताफल के बीजों को बकरी के दूध के साथ पीसकर लगाने से सिर के उड़े हुए बाल पूरी तरह उग आते हैं।

सीताफल घबराहट दूर कर हार्टबीट को बहुत सही करता है। उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए इसका सेवन बहुत ही ज्यादा लाभदायक है।

कच्चा सीताफल खाने से अतिसार और पेचिश में बहुत फायदा मिलता है। कच्चे सीताफल को काटकर सुखा दें इससे डायरिया भी ठीक होगा।
सीताफल दवा का काम भी करता है। इस फल को खाने से दुर्बलता दूर होती है।

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