प्रवासी मजदूरों का दर्द और अपना संघर्ष किताब की मदद से सभी के सामने रखेंगे सोनू सूद

कोरोना लॉकडाउन में घरों से दूर अन्य राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। ऐसे में महाराष्ट्र में अभिनेता सोनू सूद ने प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के लिए अपने खर्चे पर बसों का सञ्चालन करवाया। उन्होंने बस, फ्लाइट और ट्रेन के जरिए मजदूरों को अलग-अलग राज्यों में उनके घर तक पहुंचाया। इस दौरान उन्हें कई परेशानी खेलनी पड़ी। अपने इसी अनुभव पर सोनू सूद ने एक किताब लिखने का फैसला किया है।

सोनू ने कहा ‘मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं कि उसने मुझे इन लोगों की मदद करने का जरिया बनाया। मेरा दिल यूं तो मुंबई के लिए धड़कता है लेकिन इस मूवमेंट के बाद मुझे ऐसा लगता है कि मेरी जिंदगी का कुछ हिस्सा यूपी, बिहार, झारखंड, असम, उत्तराखंड और ऐसे ही कई राज्यों में भी बस गया है जहां मैंने नए दोस्त बनाए हैं। मैं वादा करता हूं कि मैं तब तक काम करता रहूंगा, जब तक आखिरी माइग्रेंट्स अपने घर और प्रियजनों के पास नहीं पहुंच जाता।

अभिनेता ने कहा वह अपने इस अनुभव और कहानियों को एक किताब में उतारना चाहते है। लॉकडाउन में प्राप्त अनुभव उनकी आत्मा मन रच-बस गए है। इस अनुभव को किताब के सहारे आप सभी तक पहुंचाने के लिए वह उत्साहित भी है और नर्वस भी है। उन्हें उम्मीद है इस किताब को सभी का सपोर्ट मिलेगा।

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