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जानिए मकर संक्रांति से जुडी ये खास बातें

देश भर में मकर संक्रांति की धूम है। अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले हिन्दू धर्म के इस पर्व को पूरे भारत में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। संक्रान्ति का अर्थ है सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में संचरण। सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश होने एवं सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण होने पर यह मकर संक्रान्ति पर्व मनाया जाता हैं।

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पौराणिक मान्यताएं –

कहा जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाया करते हैं। शनिदेव चूंकि मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रांति के दिन ही पवित्र नदी गंगाजी का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था जो भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं। यह भी कहा जाता है कि गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी। इसलिए मकर संक्रांति पर गंगा सागर में मेला लगता है।

मकर संक्रांति के दिन ही महाभारत के महान योद्धा भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर शरीर का परित्याग किया था।भगवान् श्री कृष्ण ने भी गीता में सूर्य के उत्तरायण का महत्त्व बताते हुए कहा है :-

अग्निर्ज्योतिरहः शुक्लः षण्मासा उत्तरायणम्‌।
तत्र प्रयाता गच्छन्ति ब्रह्म ब्रह्मविदो जनाः।।

हमारे पवित्र पुराणों के अनुसार मकर संक्रांति का पर्व ब्रह्मा, विष्णु, महेश, गणेश, आद्यशक्ति और सूर्य की आराधना एवं उपासना का पावन पर्व है, जो तन-मन-आत्मा को शक्ति प्रदान करता है।

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