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“स्टूल पिजन” ने दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड में जीता बुक ऑफ द ईयर अवार्ड

फिल्म निर्माता अभिक भानु की किताब ‘स्टूल पिजन’ हाल ही में ‘दादा साहेब फाल्के अवार्ड’ में ‘बुक ऑफ द ईयर अवार्ड ’जीत चुकी है।

निर्माता अभिक भानु ने मंगलवार को मुंबई में मीडिया से हुई  बातचीत के दौरान बताया की दादा साहेब फाल्के अवार्ड जीतना उनके लिए सबसे बड़े गर्व की बात है, और अब वह इस कहानी पर एक फिल्म बनाने जा रहे है. । ‘दादासाहेब फाल्के अवार्ड्स’ में ‘बुक ऑफ द ईयर अवार्ड’ जीतने पर अपनी भावना को साझा करते हुए, अभिक ने कहा,“ पुरस्कार जीतना एक सम्मान की बात है और इस तरह के प्रतिष्ठित पुरस्कार जीतने के बाद, मुझे लगता है कि यह एक बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है, जो आपको और अधिक बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करती है।”

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अभिक भानु की किताब “स्टूल पिजन” की कहानी उन सड़क पर रहने वाले बच्चों पर आधारित है, जो आर्थिक रूप से गरीब पृष्ठभूमि के हैं और जो सड़कों और ट्रैफिक सिग्नल पर  भीख माँगते हैं।

अपनी अवॉर्ड विजेता किताब “स्टूल पिजन” के बारे में बात करते हुए, अभिक ने कहा, “दादा साहेब फाल्के पुरस्कार आमतौर पर ऐसे लोगों को दिया जाता है जिन्होंने समाज के प्रति योगदान दिया हो, ज्यादातर तकनीशियनों को इस तरह के पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। एक लेखक के रूप में मुझे यह पुरस्कार मिला, मुझे लगता है कि इस पुस्तक के माध्यम से, उन्होंने महसूस किया होगा कि मेरी आवाज़ और उन बच्चों की आवाज़, शायद राजनेताओं के कानों तक पहुँच जाएगी, जो उन सड़क पर रहने वाले बच्चों के प्रति बिलकुल अभिज्ञ है.

मुंबई में लोग, सड़कों और ट्रैफिक सिग्नलों के आसपास रहने वाले इन बच्चों को अनदेखा करते हैं। ये झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्चे यहां सालों से हैं, और किसी को इनकी परवाह नहीं है, खासकर राजनेताओं को। अब जब किताब ने अवॉर्ड जीत लिया है, तो लोग अवॉर्ड विजेेेता पुस्तकों को गंभीरता से लेते हैं और इसी कारण मैं इस पुस्तक पर ही फिल्म बनाने की योजना बना रहा हूँ”। 

अभिक कहानी लिखने के शौकीन हैं और उन्होंने अपनी अगली किताब के बारे में जानकारी साझा करते हुए कहा, “मेरी पहली किताब का  नाम ‘डार्क रेनबो’ है। और मेरी अगली पुस्तक है ‘ब्लाइंड फेथ’। मुझे फिल्में बनाना और किताबें लिखना अच्छा लगता है”। 

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