भारत के इतिहास का सबसे मनहूस दिन है आज

भारत के इतिहास का सबसे मनहूस दिन है आज (19 जनवरी). जम्मू- कश्मीर से कश्मीरी पंडितों के विस्थापन को 31 साल हो चुके हैं. जनवरी 1990 में घाटी से कश्मीर पंडितों के विस्थापन का सिलसिला शुरू हुआ था और वहां से भगाए गए पंडित कभी वापस अपने घरों में लौट के नहीं जा सके. इस मुद्दे पर देश में सियासत तो खूब हुई, लेकिन आज तक किसी भी सरकार ने कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी के लिए ठोस कदम नहीं उठाए.

1989 से 1990 के दौरान फारुक अब्दुल्ला की सरकार थी. उसी दौर में हिन्दुओं पर सर्वाधिक अत्याचार हुए. अब्दुल्ला सरकार हिन्दुओं को सुरक्षा देने और दहशतगर्दों को रोकने में नाकाम रही थी.

वहां न राज्य सरकार थी और न केंद्र सरकार. पुलिस और प्रशासन गायब था. सारी ताकत दंगाई मुसलमानों के हाथ में थी. वे जो चाहे वो कर रहे थे. यह इतना सुनियोजित था कि – घाटी का कोई हिस्सा हिंसा से अछूता नहीं था.

पकिस्तान के झंडे लहराए जा रहे थे और जेहादी उस भीड़ का नेत्रत्व कर रहे थे. वे नारे लग रहे थे कि – यहाँ बनेगा पाकिस्तान. सरेआम हिन्दुओं को बोला जा रहा था कि या तो हमारे साथ मिल जाओ और मुसलमान बन जाओ, नहीं तो कटने के लिए तैयार हो जाओ.

कश्मीर में हिन्दुओं पर जो अमानवीय अत्याचार हुए उन पर मीडिया हमेशा खामोश रहता है.

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