गन्ने एफआरपी 3.5 रुपये क्विंटल निर्धारित

केन्द्र सरकार ने आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) प्रति क्विंटल 305 रुपये तय किया है। चालू सत्र के लिए न्यूनतम 10 प्रतिशत चीनी पड़ता के साथ गन्ने का एफआरपी 290 रुपये प्रति क्विंटल है। मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की बुधवार को हुई बैठक के इस निर्णय की जानकारी देते हुए एक बयान में कहा गया है कि पेराई सत्र 22-23 के लिए न्यूनतम 10.25 प्रतिशत चीनी पड़ता के साथ गन्ने का एफआरपी 305 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है। इसके ऊपर प्रति 0.1 प्रतिशत चीनी का पड़ता बढ़ने पर एफआरपी में 3.05 रुपये प्रति क्विंटल दिये जायेंगे।

बयान में यह भी कहा गया है कि चीनी का पड़ता 9.5 प्रतिशत से कम होने पर किसानों को 282.125 रुपये प्रति क्विंटल की दर से एफआरपी मिलेगी। विज्ञप्ति के अनुसार कृषि एवं लागत मूल्य आयोग ने 2022-23 के लिए गन्ने की ए2 और परिवार की मजदूरी जोड़कर उत्पादन लागत 162 रुपये क्विंटल निर्धारित की है। इस तरह आगामी सत्र के लिए गन्ने का एफआरपी उसकी लागत के 50 प्रतिशत से अधिक है।

पिछले आठ वर्ष में गन्ने का एफआरपी कुल मिलाकर 34 प्रतिशत बढ़ाया गया है ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सके। बयान के अनुसार इस निर्णय से गन्ने की खेती करने वाले पांच करोड़ गन्ना किसानों और उनके आश्रितों तथा चीनी मिल और सहायक उद्योगों में कार्यरत पांच लाख कर्मचारियों को फायदा होगा।

सरकार ने कहा है कि 2013-14 में गन्ने का एफआरपी 210 रुपये क्विंटल था और 23.97 करोड़ टन गन्ने की खरीद की गयी थी। उस समय किसानों को मिलों से गन्ने के लिए 51 हजार करोड़ रुपये मिल रहे थे, पिछले आठ वर्षों में एफआरपी में 34 प्रतिशत की वृद्धि की गयी। मौजूदा पेराई सत्र 2021-22 में मिलों ने 115196 करोड़ रुपये मूल्य का 35.03 करोड़ टन गन्ना खरीदा, यह अब तक की गन्ने की अब तक सबसे बड़ी खरीद है।

सरकार का अनुमान है कि अक्टूबर से शुरू हो रहे पेराई सत्र 2022-23 में चीनी मिलों द्वारा 36 करोड़ टन गन्ने की खरीद की जायेगी और किसानों को उसके लिए 120000 करोड़ रुपये मिलेंगे। केन्द्र ने बयान में यह सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है कि गन्ना किसानों को उनका देय समय से मिले, इसके लिए वह हरसंभव किसान हितैषी कदम उठायेगी। भारत ने ब्राजील को पीछे छोड़कर चीनी उत्पादन में इस समय पहला स्थान बना लिया है।

पिछले आठ वर्ष से चीनी के उत्पादन में निरंतर वृद्धि हो रही है, इससे देश अपनी जरूरत की चीनी पैदा करने के साथ-साथ चीनी का निर्यात भी लगातार कर रहा है और इससे सरकार को राजकोषीय घाटा कम करने में मदद मिल रही है। वर्ष 2017-18, 2018-19, 2019-20 और 2020-21 में भारत से क्रमश: छह लाख टन , 38 लाख टन, 59.60 लाख टन और 70 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया। चालू विपणन सत्र 2021-22 में पहली अगस्त में चीनी का निर्यात एक करोड़ टन तक पहुंच गया है और सत्र के अंत तक इसके 1.12 करोड़ टन पहुंचने की संभावना है।

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