सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा की जांच के लिए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों को दी देखरेख की जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर को हुई हिंसा से संबंधित मामलों की सुनवाई आज 8 नवंबर से फिर से शुरू की है। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी आज की सुनवाई में लखीमपुर खीरी मामले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर की गई स्थिति रिपोर्ट पर नाखुशी जाहिर की।

ज्ञात हो कि ज्ञात हो कि आज से एक महिना पूर्व 8 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस हिंसा के लिए खिंचाई करते हुए कहा है कि लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की जांच में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से संतुष्ट नहीं है।

आज सोमवार 8 नवंबर को लखीमपुर खीरी हिंसा मामलों की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति रिपोर्ट में यह कहने के अलावा कुछ भी नहीं है कि और गवाहों से पूछताछ की गई है। ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था।

लखीमपुर खीरी मामलों की सुनवाई करते करते हुए आज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि मामले में सबूतों का मिश्रण नहीं है, हम मामले की जांच की निगरानी के लिए एक अलग उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश को नियुक्त करने के इच्छुक हैं।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आज की सुनवाई में इस बात पर सहमति जताई कि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राकेश कुमार जैन (सेवानिवृत्त) या न्यायमूर्ति रंजीत सिंह (सेवानिवृत्त) लखीमपुर खीरी जांच की देखरेख कर सकते हैं।

ज्ञात हो कि विगत 3 अक्टूबर को यूपी के लखीमपुर खीरी में एक गाड़ी द्वारा सड़क पर प्रदर्शन कर रहे चार किसानों को कुचल दिया गया था। जिसके प्रतिउत्तर में हुई मॉब लिंचिंग में 4 अन्य लोग भी मारे गए थे,

जिसमें भाजपा के कार्यकर्ता और पत्रकार भी शामिल थे। 3 अक्टूबर की इस घटना में कुल 8 लोग मारे गए थे। इस मामले में कई राजनीतिक लोगों के शामिल होने व किसान मुद्दा होने के कारण उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में सक्रिय राजनीतिक दलों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। इस हिंसक घटना के प्रभाव आगामी वर्ष 2022 में यूपी के विधानसभा के चुनाव में भी पड़ने के आसा