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सीता के अपमान को न सह सकने के कारण लक्ष्मण ने काटी थी शूर्पणखा की नाक

एक समय की बात है पंचवटी में राम, लक्ष्मण, सीता तीनों कुटी के सामने चबूतरे पर बैठे थे । इतने में कहीं से एक राक्षसी आई । राम को देखते ही उसके  मन में राम के प्रति लालच आ गया वह राम को वरने की सोचने लगी ।

 

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दानवी शूर्पणखा ने अपना परिचय सभी को दिया की मैं महाप्रतापी लंकापति रावण की बहन शूर्पणखा हूं । महाबली कुंभकर्ण और विभीषण मेरे सगे भाई तथा खर और दूषण चचेरे भाई हैं । संसार में मेरे समान सुन्दरी और सौभाग्यशालिनी स्त्री दूसरी नहीं है । मैं तुम्हें स्वेच्छा से अपना पति बनाना चाहती हूं ।

राम ने कहा मैं तो एक स्त्रीधारी विवाहित हूँ| सीता की सौत होने में तुम्हें क्या सुख मिलेगा |

तभी शूर्पणखा ने राम से ध्यान हटा लक्ष्मण पर लगा दिया | शूर्पणखा राम को छोड़कर लक्ष्मण के पीछे पड़ गई । लक्ष्मण ने उत्तर दिया–देवी! मैं तो बड़े भाई का दास हूं । तुम्हें भी मेरी तरह दासी बनना पड़ेगा

वह न वर्दास्त न कर सकी और सीता की ओर दौड़ी और उसको बहुत अपमानित किया । लक्ष्मण ने झपटकर तलवार से उसकी  नाक काट दी। शूर्पणखा अपमानित  क्रोध में चली गई  | यह जिधर से आई थी, उसी ओर चिल्लाती हुई भाग गई ।

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