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ईश्वर से विमुख होने के कारण दुखी हैं लोग: स्वामी अभेदानंद

चिन्मय मिशन जयपुर में चल रहे भगवत गीता एवं कठोपनिषद के ज्ञान यज्ञ में जयपुर के ज्ञानी जनों को स्वामी अभेदानंद जी आत्म ज्ञान प्राप्ति के सुगम मार्ग पर प्रवचन कर रहे है।

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एक मात्र आत्म ज्ञान ही मोक्ष का साधन है इसके लिए आवश्यक है की जीवन में हम कर्म योग का अनुष्ठान करे।

अधिकांश लोग सोचते है की गीता वृद्धावस्था में या किसी की मृत्यु के समय पढ़ने का ग्रन्थ है लेकिन यह गलत धारणा है गीता जीवन जीने की कला सिखाती है और जीवन को कुशलता पूर्वक व्यतीत करने का रहस्य ही कर्म योग में छिपा है।

अपने संकल्प को ईश्वर के संकल्प में मिलाने का नाम ही कर्म योग है।

हमारे जीवन का केंद्र ईश्वर ही होना चाहिए हमारे सारे कार्य ईश्वर द्वारा बनाये हुए संजोग से ही संभव है अतः हमें ईश्वरीय शक्ति को अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए।

अहंकार एक भयंकर भूख हो गयी है जो अपने आप को बड़ा बना हुआ देखने की अतृप्त इच्छा है।

जीवन में से व्यक्तिगत संकल्प कम करने से हमारे तनाव चले जाता है और ईश्वरीय संकल्प हमारे साथ जुड़ने लगते है और हम असीमित शक्तियों के स्वामी बन जाते है।

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