कोरोना की खौफ ने प्रतापगढ़ के ग्रामीणों ने बना दिया कोरोना माता का मंदिर

कोरोना का खौफ ऐसा की उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में सांगीपुर थाना के जूही शुक्लपुर गांव में कोरोना को लेकर अंधविश्वास जोरों पर है. यहां आश्चर्य की बात तो यह है अंधविश्वास में तैयार इस मंदिर में ग्रामीणों समेत दूर-दराज से लोग भी पहुंच रहे हैं. यहां लोग कोरोना माता की पूजा अर्चना ग्रामीण राधे वर्मा का दावा है कि कोरोना माता की पूजा करने से हमारे गांव में कोरोना का संक्रमण नहीं फैलेगा.

कई लोग इसको अंधविश्वास मान रहे हैं वहीं प्रतापगढ़ के जूही गांव में फैले अंधविश्वास अब चर्चा का विषय बन गया है लेकिन पुलिस और स्वास्थ्य महकमा इसको रोकने के लिए कोई भी ठोस गांव में कोरोना से तीन मौत और कई ग्रामीणों को कोरोना पॉजिटिव होने के बाद आई दहशत के कारण अब दवा के साथ दुआ की तलाश भी शुरू कर दी

इसे अंधविश्वास नहीं तो और क्या कहेंगे। लोगों ने कोरोना से बचाव के लिए आस्था की राह पर चलकर कोरोना माता की मूर्ति स्थापित कर दी। हैरानी तो इस बात की है कि ग्रामीण मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए भी पहुंच रहे हैं। हालांकि मंदिर में प्रवेश के लिए बनाए गए नियम लोगों को संक्रमण के प्रति जागरूकता का संदेश दे रहे हैं।

कोरोना संक्रमण ने लोगों के जेहन में खौफ पैदा कर दिया है। परेशान लोगों ने अब आस्था की राह अपनाई। सांगीपुर के पूरे जूही (शुकुलपुर) में महामारी से तीन मौतें हुईं तो लोग डर गए। गांव के लोकेश श्रीवास्तव की पहल के बाद ग्रामीणों ने सात जून को कोरोना माता की मूर्ति स्थापित कराई। विशेष ऑर्डर पर तैयार कराई मूर्ति को गांव में नीम के पेड़ के पास स्थापित कर इसे कोरोना माता मंदिर का नाम दिया गया।

ग्रामीणों का मानना है कि पूर्वजों ने चेचक को माता शीतला का स्वरूप माना था अब कोरोना भी देवी माता का ही रूप है। हालांकि जानकारों का कहना है कि जब समाज बीमारी या फिर महामारी से हार जाता है तो भयभीत होकर पूजा-अर्चना करने लगता है।

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