प्राचीन लोग अपनाते थे ये तरीके गर्भनिरोधक गोली की जगह !

अमेरिका की दिग्गज बर्थ कंट्रोल एक्टिविस्ट मार्गरेट सेंगर ने वैज्ञानिकों से गर्भनिरोधक गोली के लिये आग्रह किया था ताकि महिलाओं को पुरुषों की बराबरी करने में बहुत मदद मिले। और उनकी ये बराबरी उनकी यौन इच्छाओं की पूर्ति के मामले में भी पुरुषों जैसी ही हो।

इस गर्भनिरोधक गोली से 20वीं शताब्दी में न सिर्फ सामाजिक बल्कि आर्थिक क्रांति भी आयी। इससे पहले महिलायें बेपरवाह यौन संबंध बनाने में संकोच करती थीं।

हालांकि गर्भनिरोध के अलग-अलग तरीकों का पुराने समय से भी इस्तेमाल होता आ रहा है। आइये जानते हैं कि क्या तरीके अपनाते थे पुराने समय के लोग-

मगरमच्छ का मल- 1850 ईसा पूर्व के दस्तावेजों को खंगालने में इस बात का पता चला कि प्राचीन मिस्र की महिलायें इस तरीके को अपनाती थीं। मगरमच्छ के मल को वजाइना में इंफेक्शन और गर्भ को रोकने के लिये किया जाता था। चूंकि ये क्षारीय होता है इसलिये इसमें आधुनिक शुक्राणुनाशक की तरह गर्भ को रोकने के गुण होते हैं।

निचोड़े हुये आधे नींबू का इस्तेमाल- कैसेनोवा के संस्मरण में बर्थ कंट्रोल को लेकर इस प्रयोग का ज़िक्र हुआ है। तरीके के तहत आधा कटा और निचोड़ा हुआ नींबू का इस्तेमाल भेड़ के मूत्राशय के बने कॉन्डम में किया जाता था। चूंकि नींबू में साइट्रिक एसिड होता है। जो शुक्राणुनाशक का काम भी करता है। इसलिये इसका इस्तेमाल होता था।

हालांकि अब दुनिया इन तरीकों से काफी आगे निकल चुकी है। अब इसके लिये नये तरीकों का इस्तमाल होने लगा है। जिनकी जगह गर्भनिरोधक गोलियों ने ले ली है।

एक अध्ययन के मुताबिक यौन संबंधों के मामले में सक्रिय प्रत्येक 100 महिलाएं जिन्होंने गर्भ से बचने के लिए कॉन्डम को अपनाया उनमें से 18 गर्भवती हो गईं।

इस मामले में गर्भनिरोधक गोलियां बहुत ज़्यादा सुरक्षित हैं। कॉन्डम की तुलना में इसकी नाकामी दर 6 फ़ीसदी है। इस हिसाब से यह कॉन्डम की तुलना में लगभग तीन गुना ज़्यादा सुरक्षित होती है।

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