अगर ऐसे पकाया जाए चिकन को तो नहीं होगा ‘बर्ड फ्लू’ का खतरा!

कई राज्यों में ‘बर्ड फ्लू’ होने की खबर ने तहलका मचा रखा है। यह पक्षियों में होने वाले फ्लू का मानव संस्करण है जिसे “एवियन इन्फ्लूएंजा” कहा जाता है। इस संक्रमण की शुरुआत पक्षियों से होती है।

अगर कोई इंसान को संक्रमित पक्षियों या उनके संक्रमित पंख या मल के संपर्क में आए, तो उसे भी बर्ड फ्लू हो सकता है। जब भी बात बर्ड फ्लू की आती है तो सबका ध्यान चिकन और अंडो पर चला जाता है।

लेकिन आपकों यहां यह बता दें कि ये बीमारी चिकन खाने से नहीं होती। अगर चिकन को ढंग से पकाया जाए, तो इसे खाया जा सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर खाने को ठीक से पकाया जाता है, तो चिकन या अन्य ऐसी चीज़ें खाने के लिए सुरक्षित हैं। हालांकि, साथ ही ये साफ किया कि इस बात का ख्याल रखना भी ज़रूरी है कि संक्रमित पक्षी इस फूड चेन का हिस्सा न बन जाएं।

जिन क्षेत्रों में पोल्ट्री में एवियन इन्फ्लूएंज़ा का प्रकोप नहीं है, वहां इसे खाने से संक्रमण या मौत का ख़तरा नहीं है। अभी तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है जिसमें मांस खाने से किसी को फ्लू हुआ हो। ये बीमारी आमतौपर पर पक्षियों से पक्षियों में फैलती है।

अगर चिकन, बत्तख, गीस या टर्की को अच्छे तरीके से 70 डिग्री सेल्सियस पर या उससे अधिक तापमान पर पकाया जाए, तो H5N1 वायरस मर जाएगा। साथ ही इस बात का ख्याल रखा जाए कि मांस का कोई भी हिस्सा कच्चा या लाल न रहे, तो इसे खाना सुरक्षित है। चिकन या अन्य मांस को जब तक पकाना न हो फ्रिज में ही रखें।

कच्चे मांस को बाकी खाने की चीज़ों से दूर रखें। मांस को पकाने के बाद जिन बर्तन का इस्तेमाल किया गया जैसे- कटिंग बोर्ड, चम्मच को अच्छी तरह धो लें। साथ ही कच्चे मांस को छूने के बाद हाथों को ज़रूर धो लें। चिकन को अच्छी तरह पकाएं। बचे हुए खाने को फौरन फ्रिज में रखें।

यह भी पढ़ें:

नपुंसकता दूर करने के लिए एक सफेद प्याज ही काफी है, जानिए कैसे?