रघुवंश प्रसाद के मृत्यु से लालू के साथ की कई वर्षो की राजनीतिक दोस्ती टूट गई

बिहार की राजनीति मे अपनी लोहा मनवा चुके रघुवंश प्रसाद सिंह का आज एम्स मे निधन हो गया। रघुवंश प्रसाद सिंह लोकदल के जमाने से ही लालू प्रसाद के राजनीतिक साथी रहे। कर्पूरी ठाकुर की मौत के बाद कई वरीय नेताओं के मौजूद रहते भी रघुवंश प्रसाद सिंह ने लालू प्रसाद को नेता बनाने मे अपनी जी-जान लगा दिया। लालू यादव को शुरुआती राजनीतिक सफर से ही रघुवंश बाबू ने साथ दिया था। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने भी रघुवंश बाबू की किसी सलाह को दरकिनार नहीं किया। रघुवंश प्रसाद पार्टी के संकटमोचक के रूप में भी काम करते रहे। यही कारण है कि पार्टी मे रघुवंश प्रसाद सिंह का एक अलग ही रुतबा था।

गौरतलब है कि केन्द्र में सरकार बनी तो रघुवंश बाबू ने ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में जो काम किया कांग्रेस भी इसकी कायल रही है। नरेगा कि शुरुआत इन्होने ही अपने मंत्रित्व काल मे किया था जो अब मनरेगा के नाम से जाना जाता है। लालू प्रसाद जब भी किसी परेशानी में पड़े रघुवंश प्रसाद हमेशा उनके साथ रहे। राजद सुप्रीमो पर उठने वाले किसी भी सवाल का वो डट कर सामना करते थे और उसका जबाब भी देते थे। यही वजह थी कि जब रघुवंश बाबू ने अपना इस्तीफा भेजा तो राजद पार्टी मे खलबली मच गयी थी।