सनातन धर्मावलंबियों का पवित्र पितृपक्ष आज से शुरू

आज से सनातन धर्मावलंबियों का पवित्र पितृपक्ष शुरू हो गया है। भाद्रपद शुक्ल की पूर्णिमा तिथि से यह पक्ष शुरू होता है। आज देव-ऋषि को तर्पण करने के साथ पितृपक्ष आरंभ हो जाएगा। गुरुवार को आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि से लोग अपने पितरों को तिल, जौ से तर्पण करेंगे। धर्म के जानकारों के अनुसार पितरों को जल और तिल से तर्पण करने से उनकी आत्मा तृप्त होती है। उनका आशीष परिवार पर बना रहता है।

पितरों के तर्पण का कार्य गंगा तट, नदी, तालाब में करने का विधान है लेकिन इस बार कोरोना की वजह से लोग अपने घर में या बगल के किसी जलाशय के पास ही तर्पण करेंगे। सरकार द्वारा कोरोना महामारी को लेकर जारी गाइडलाइन के अनुसार कही भी भीड़ इकठ्ठा करने की इजाज़त नहीं है।

कुंडली से पितृदोष की शांति, पुरखों का आशीष एवं पितरों की तृप्ति के लिए गुरुवार से तर्पण का कार्य आरंभ हो जाएगा। ऐसी मान्‍यता है कि अश्विन कृष्ण प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक पूरे 15 दिनों तक यमराज पितरों को मुक्त करते हैं। इसके बाद सभी पितर अपने-अपने हिस्से का ग्रास लेने के लिए अपने वंशजों के पास आते हैं, जिससे उनके आत्मा को तृप्ति मिलती है। जिन लोगों को अपने पितरों के मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है, वे सर्वपितृ अमावस्या के दिन अपने पितरों का श्राद्ध और तर्पणकर सकते है।

पितृपक्ष की महत्वपूर्ण तिथियाँ :

इस बार अगस्त्य ऋषि तर्पण- 02 सितंबर(बुधवार), पितृपक्ष आरंभ (प्रतिपदा)– 03 सितंबर(गुरुवार), चतुर्थी श्राद्ध– 6 सितंबर (रविवार), मातृ नवमी – 11 सितंबर(शुक्रवार), इंदिरा एकादशी- 13 सितंबर(रविवार), चतुर्दशी श्राद्ध- 16 सितंबर(बुधवार), अमावस्या, महालया व सर्वपितृ विसर्जन – 17 सितंबर(गुरुवार) होगा। 17 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ ही पितृपक्ष का समापन हो जाएगा।