डीलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट बोले- इस वजह से इलेक्ट्रिक स्कूटर में लग रही आग, सरकार ने नहीं बनाए कोई नियम

गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, तमिलनाडु समेत कई राज्यों में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर में आग लगने का मामले सामने आ चुके हैं। ये सिलसिला 25 मार्च को तमिलनाडु के वेल्लोर जिले से शुरू हुआ था, जो बदस्तूर जारी है। फर्क सिर्फ इतना था कि कंपनियां और मॉडल बदलते चले गए।

आग लगने की घटनाओं के बाद सरकार ने बैटरी से जुड़े नॉर्म्स में बदलाव का फैसला किया। साथ ही, इसकी जांच के लिए एक कमेटी भी तैयार कर दी। हालांकि, कम्पलीट रिपोर्ट का अभी भी इंतजार है। ऑटो एक्सपर्ट अमित खरे बताते हैं कि अभी तक देश में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर को लेकर को पॉलिसी ही नहीं है

जो भी पॉलिसी हैं वो इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर को लेकर तैयार की गई है। अब तक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बैटरी में लगने वाली आग से हम क्यों नहीं उबर पाए हैं? जो बैटरी चीन की गाड़ियों में शानदार परफॉर्मेंस देती हैं, वो हमारे देश में क्यों फेल हो रही हैं? भारत की तुलना में किन देशों की इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी ज्यादा बेहतर है? इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर को बेहतर बनाने के लिए सराकर को कौन से कदम उठाने चाहिए? इस स्टोरी में आपको इन तमाम सवालों के जवाब मिलेंगे।

इलेक्ट्रिक व्हीकल की डिमांड वाले टॉप-5 देश

स्टेटिस्टा के आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में प्लग-इन इलेक्ट्रिक व्हीकल की डिमांड चीन में सबसे ज्यादा है। इलेक्ट्रिक व्हीकल कैटेगरी में प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल (PHEV) और बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (BEV) शामिल हैं। पिछले साल चीन में 78 लाख इलेक्ट्रिक व्हीकल बिके। वहीं, यूएस में 20 लाख, जर्मनी में 13 लाख, यूके में 7.45 लाख और फ्रांस में 7.24 लाख ईवी बिके। जबकि भारतीय बाजार में फाइनेंशियल ईयर 2022 के दौरान 2.50 लाख इलेक्ट्रिक व्हीकल बिके।

दक्षिण-पूर्व एशिया के 11 देशों की पॉलिसी

दक्षिण-पूर्व एशिया (Southeast Asia) के 11 देशों में इलेक्ट्रिक व्हीकल से जुड़ी पॉलिसी काफी मजबूत है। इनमें ब्रुनेई (Brunei), बर्मा (म्यांमार) Burma (Myanmar), कंबोडिया (Cambodia), तिमोर-लेस्ते (Timor-Leste), इंडोनेशिया (Indonesia), लाओस (Laos), मलेशिया (Malaysia),

फिलीपींस (Philippines), सिंगापुर (Singapore), थाईलैंड (Thailand) और वियतनाम (Vietnam) शामिल हैं। इन सभी देशों में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर को लेकर एक जैसी पॉलिसी है। पॉलिसी में मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी का पूरा ध्यान रखा गया है।

मैकेनिकल सेफ्टी : ई-व्हीकल पॉलिसी के मुताबिक, मैकेनिकल सेफ्टी के लिए ईवी में कई मोड में इस्तेमाल किया जाए। जिसमें आइडल मोड भी शामिल हो। जब ईवी को ON किया जाए तब गाड़ी में मौजूद डिस्प्ले और दूसरी एक्सेसरीज को पावर मिले, लेकिन मोटर एक्टिव नहीं होना चाहिए। जब गाड़ी को OFF किया जाए व्हीकल पूरी तरह डिसेबल हो जाना चाहिए। RUN मोड में ही व्हीकल आगे बढ़ना चाहिए।

व्हीकल की अलग-अलग कैटेगरी में रेंज भी अलग-अलग होना चाहिए। जैसे- पडेस्ट्रीअन में 10Km, स्लो में 25Km, लो स्पीड में 45Km, इंटरमीडिएट में 60Km और हाई स्पीड में 80Km हो। व्हीकल के कई पार्ट्स जैसे फ्रेम, टायर्स, रिम या अन्य का ड्रॉप टेस्ट भी अनिवार्य है। ताकि ये सुनिश्चिक हो सके की सड़क पर झटके के दौरान ये सुरक्षित रहेंगे।

इलेक्ट्रिकल सेफ्टी : पॉलिसी के मुताबिक, इलेक्ट्रिक व्हीकल में इलेक्ट्रिकल सेफ्टी सबसे ज्याादा जरूरी है। इसके लिए पॉलिसी में वोल्टेज क्लासिफिकेशन किया गया है। जैसे, लो वोल्टेज के दौरान नोमिनल सिस्टम वोल्टेज <60VDC या <30VAC होना चाहिए।

हाई वोल्टेज के दौरान नोमिनल सिस्टम वोल्टेज >60VDC या >30VAC होना चाहिए। इसी तरह हाई पोटेंशियल टेस्ट के दौरान टेम्परेचर 25 ºC ± 5 ºC पर होना चाहिए। आर्द्रता 85% से 100% के अंदर होना चाहिए। प्रेशर 86 kPa से 106 kPa के बीच होना चाहिए। इस टेस्ट के दौरान डैमेज होने वाले पार्ट को रिप्लेस किया जाएगा। टेस्टिंग से पहले ट्रैक्शन बैटरी को हटा दिया जाता है।

भारत ही नहीं इन देशों में भी मिल रही ई-व्हीकल पर सब्सिडी

इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने पर कई अलग-अलग देश सब्सिडी दे रहे हैं। खासकर 2020 के बाद से सब्सिडी को बढ़ाया गया है। फ्रांस, जर्मनी, इटली और चीन ने ई-व्हीकल खरीदने वालों को एडिशनल सब्सिडी दी है। भारत ने भी फेम-2 योजना के तहत अब ज्यादा सब्सिडी मिलती है। इन देशों में मिल रही सबसे ज्यादा सब्सिडी।

फ्रांस: बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (BEV) पर 8000 डॉलर और हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल (PHEV) पर 2850 डॉलर तक की सब्सिडी।
जर्मनी: बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (BEV) पर 12000 डॉलर और हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल (PHEV) पर 7700 डॉलर तक की सब्सिडी।
इटली: बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (BEV) पर 6800 डॉलर और हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल (PHEV) पर 4000 डॉलर तक की सब्सिडी।
चीन: बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (BEV) पर 3500 डॉलर और हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल (PHEV) पर 1400 डॉलर तक की सब्सिडी।
भारत: फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक एंड हाइब्रिड व्हीकल्स इन इंडिया (FAME-2) स्कीम के तहत 15,000 रुपए प्रति kWh कर सब्सिडी।

एक्सपर्ट ने बताया सरकार कौन से जरूरी कदम उठाए

सरकार को इलेक्ट्रिक व्हीकल में आग लगने की घटनाओं को रोकने और बैटरी की क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए कुछ जरूरी कम उठाने की जरूरत है। इसके बारे में यूट्यूबर ऑटो एक्सपर्ट अमित खरे (आस्क कारगुरु) ने कई बातें शेयर की हैं। उनका मानना है कि यदि सरकार इन बातों पर ध्यान देती है तब हम इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में ज्यादा मजबूत हो जाएंगे और लोगों का भरोसा भी इनकी तरफ बढ़ेगा।

BMS में मल्टीपल सेंसर मिलें : अब बैटरी में जिन चेंजेस की जरूरत है उसमें हीट सिंक का इस्तेमाल सबसे जरूरी हो गया है। साथ ही BMS को अपडेट करना जरूरी हो गया है। ऐसे BMS होने चाहिए जो ज्यादा से ज्यादा सेंसर्स के साथ हों।

ताकि वो एकदम सटीक डेटा ले सकें। BMS गाड़ी के जिस हिस्से में होता है वहां टेम्परेचर होता नहीं है, जबकि बैटरी के दूसरे हिस्से में टेम्परेचर बहुत ज्यादा होता है। ऐसे में जरूरी है कि अब BMS में मल्टीपल सेंसर सिस्टम का इस्तेमाल किया जाए।

बैटरी सर्टिफिकेशन अनिवार्य हो : सरकार को ये करना चाहिए कि जैसे कार के लिए ARAI और BIS सर्टिफिकेशन जरूरी हो गया है, उसी तरह इलेक्ट्रिक व्हीकल में इस्तेमाल होने वाली बैटरी के लिए भी सर्टिफिकेशन जरूरी होना चाहिए। जब तक बैटरी अप्रूव नहीं हो उसे व्हीकल में इस्तेमाल नहीं किया जाए।

अभी बैटरी दूसरे देशों से मंगाकर डायरेक्टर इस्तेमाल होती है। सर्टिफिकेशन अथॉरिटी को कम से कम एक महीने की टेस्टिंग या 1 हजार किलोमीटर चलाने के बाद भी बैटरी को ओके करे। ताकि बैटरी से जुड़ी सही जानकारी सामने आ सके।

बैटरी और वायरिंग को सुधारा जाए : इलेक्ट्रिक टू-व्हील में इस्तेमाल होने वाली मौजूदा बैटरी को इम्पोर्ट करते डायरेक्ट इस्तेमाल किया जाता है। यानी कंपनियां बैटरी की क्वालिटी से पूरी तरह समझौता कर लेती हैं। जबकि बैटरी की क्वालिटी को बेहतर किया जाए, जैसे- इसमें कूलेंट का यूज हो, प्लास्टिक ज्यादा मजबूत हो, तब उसकी कीमत में 1000 से 2000 रुपए का अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा।

इस छोटे से खर्च में गाड़ी तो सुरक्षित होगी ही, लोगों को पूरी सुरक्षा भी मिलेगी। बैटरी सिस्टम के साथ वायरिंग भी बेहतर होनी चाहिए। अभी वायरिंग की क्वालिटी भी बेहद खराब है। जैसे गाड़ी में 10 एम्पीयर के वायर की जरूरत है तब उसे 20 या 25 एम्पीयर तक लगाना चाहिए।

देश के टेम्परेचर के हिसास से बनें : देश की ज्यादातर कंपनियां चीन से इम्पोर्ट की गईं बैटरी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर में इस्तेमाल कर रही है। ऐसा नहीं है कि इन बैटरी की क्वालिटी खराब है, लेकिन देश के क्लाइमेट को देखते हुए इनकी क्वालिटी खराब हो जाती है।

चीन का टेम्परेचर हमारे यहां से काफी कम है। इस वजह से जो बैटरी चीन की ईवी में बेहतर काम करती है, वो यहां आकर फट जाती हैं। देश में तापमान 48 डिग्री तक चला जाता है। ऐसे में जब बैटरी इस टेम्परेचर में तेजी से गर्म होती है और हादसे की वजह बन जाती है।

कड़े नियम नहीं होने से नुकसान हो रहा: विंकेश गुलाटी

इस बारे में लाइव हिन्दुस्तान से बात करते हुए फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) प्रेसिडेंट विंकेश गुलाटी ने कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल की मैन्युफैक्चरिंग के लिए अभी सरकार द्वारा कोई कड़े नियम नहीं बनाए गए हैं। जिन इलेक्ट्रिक व्हीकल की स्पीड 25Km/h से कम होती है उनकी हैवी टेस्टिंग नहीं होती है।

इलेक्ट्रिक व्हीकल की कंपनियों का एक बड़ा वर्ग सिर्फ ग्लोबल मार्केट में पहले से मौजूद मॉडल को इम्पोर्ट कराकर भारतीय बाजार में बेच रहा है। ऐसे व्हीकल देश की सड़कों के हिसाब से तैयार नहीं होते। ऐसे में जब इसने कोई घटना घटती है तब ग्राहकों के मन में भी डर बैठ जाता है।

अब जरूरी है कि कोई भी कंपनी अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल को बाजार में लॉन्च करने से पहले उसे 1 लाख किलोमीटर चलाकर टेस्टिंग करे। उसे भारत की सभी कंडीशन के हिसाब से चेक किया जाए। फाडा ने अपनी डीलर्स से कहा है कि वो ग्राहकों को इलेक्ट्रिक व्हीकल से जुड़ी जरूरी गाइडलाइन बताए।

2030 तक ईवी की 1 करोड़ यूनिट का आंकड़ा पार होगा

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की रिटेल बिक्री में भारी उछाल आया है। पिछले FY21 की तुलना में FY22 में इलेक्ट्रिक व्हीकल की रिटेल बिक्री तीन गुना से अधिक बढ़ी है। खासकर टू-व्हीलर की डिमांड सबसे ज्यादा बढ़ी है।

ईवी की बिक्री 2021-22 में 4,29,217 यूनिट्स तक पहुंच गई, जो 2020-21 में 1,34,821 यूनिट्स थी। अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन परामर्श कंपनी आर्थर डी लिटिल (ADL) की एक स्टडी के मुताबिक, 2030 तक इलेक्ट्रिक व्हीकल की डोमेस्टिक सेल्स 1 करोड़ यूनिट्स के आंकड़े को पार कर जाएगी। ये कुल पैसेंजर व्हीकल का 10% होगा।

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