युरीन में जलन के होते हैं कई कारण, यह उपाय अपनाकर पाएं छुटकारा

युरीन करते समय जलन, दर्द, बूंद-बूंद युरीन आना, युरीन करने के बाद भी युरीन की इच्छा बनें रहना, पेट के निचले हिस्से में दर्द होना, युरीन का रंग पीला, लाल, धूमिल होना, कंपकपी देकर बुखार आना आदि प्राब्लम होने पर समझना चाहिए युरीन इंफैक्शन यानी पेशाब के संक्रमण का शिकार हैं।

युरीन की जलन की समस्या स्त्री व पुरूषों दोनों में देखी गयी है। किन्तु पुरूषों की अपेक्षा स्त्रियों में यह प्राब्लम अधिक देखी गयी है। युरीन में जलन उत्पन्न होने के कई कारण है। युरीन इंफैक्शन प्राब्लम के लिए बैक्टीरिया जैसे कोलीफार्म, क्लेबसीला, प्रोटीयस, इकोलोई, टीबी या गनोकोकस आदि जिम्मेदार होते है। यह युरीन सिस्टम के किसी भाग को संक्रमित कर सकते हैं। डायबिटीज से पीड़ित होना, पुरूषों में प्रोटेस्ट ग्लैंड के स्त्राव का जंतुनाशक होना, स्त्रियों के मूत्र निकासी की नली छोटी होना, संभोग तथा गर्भधारण आदि कारण हो सकते हैं. स्त्री में बार-बार होने वाले युरिन इंफैक्शन के लिए उसका पति जिम्मेदार हो सकता है. स्टोन (पथरी) की शिकायत होने पर भी युरीन में जलन के साथ तेज दर्द की शिकायत हो सकती है।

बीमारी की पहचान करने के लिए युरीन टेस्ट की आवश्यकता होती है इसके लिए यूरीन कल्चर एक विशेष जांच की जाती है जिससे रोग के जिम्मेदार बैक्टीरिया का पता चल जाता है। बैक्टीरिया का संक्रमण होने पर एंटी बाॅयोटिक दवाओं का सेवन कराया जाता है। एक-दो दिन में युरीन की जलन की समस्या दूर हो जाती है। जलन दूर होने के बाद भी डाक्टर द्वारा लिखी गयी दवा का पूरा कोर्स करना चाहिए अन्यथा दुबारा अटैक की संभावना रहती है।

अब इस जाँच से होगा कैंसर का सही उपचार

किसी स्त्री को बार-बार युरीन में संक्रमण की शिकायत होने पर उसके पति की भी जांच करनी जरूरी होती है।जांच रिर्पोट में किसी तरह के बैक्टीरिया की संभावना होने पर दोनों को ही पूरा कोर्स लेने की जरूरत होती है। इस रोग से बचने के लिए मूत्र विसर्जन के बाद अंब को अच्छी तरह से पानी से साफ करना चाहिए।

स्त्री को महावारी के समय में विशेष साफ-सफाई पर ध्यान देने की जरूरत होती है स्त्री को चाहिए वह किसी के टावेल, पैंटी, साबुन आदि का इस्तेमाल न करें। अंडरगारमेंट की नियमित सफाई करे. रोजान साफ धुला हुआ पैंटी पहने।

पेशाब के संक्रमण के दिनों में तेज मसालेदार चीजें, गरम खाना, नशीली चीजें आदि का सेवन न करे, हल्का सुपाच्य भेजन करेतथा अपने आहार में हरी सब्जियों व ताजे फलों को शामिल करें।

पानी का अधिक सेवन करें नारियल का पानी, संतरा, मौसम्बी, का जूस लें. ग्लुकोज का पानी पी सकते हैं।

ऐसे समय में यौन संबंध बचना चाहिए क्योंकि ऐसे में बैक्टीरिया एक-दूसरे के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

पेशाब में जलन की शिकायत होने पर किसी घरेलू इलाज के चक्कर में नहीं रहना चाहिए. इससे बीमारी अधिक बढ़ने की संभावना रहती है।