हो सकती है परलिसिस की संभावना अगर नहीं हुआ समय पर टीबी का इलाज

आप पता होगा कि कुछ वर्षो पहले तक टीबी की बीमारी होने पर कोई भी उस व्यक्ति से बात करना या उसके पास जाना तक भी पंसद नहीं करता था। लेकिन सरकार और शिक्षा के प्रयासों के कारण अब लोगों में यह वहम बहुत कम हुआ है लेकिन अब लोग टीबी की बीमारी को बहुत ही हल्के रूप में लेने लगे है। अगर सही समय पर फेफड़ों में होने वाली बीमारी टीबी का इलाज नहीं करें तो यह ब्रेन और स्पाइन तक भी पहुंच सकती है। ब्रेन और स्पाइन में टीबी होने की वजह से मरीज को परैलिसिस हो सकता है और वह कोमा में भी जा सकता है। इस बीमारी में लंबे समय तक बुखार के साथ-साथ सिरदर्द भी रह सकता है। यह एक संक्रमित बीमारी है। जो सावधानी नहीं रखने पर किसी भी व्यक्ति को हो सकती है।

खासकर इस बीमारी में बहुत सर्तकता बरतनी चाहिए नहीं तो आस-पास के लोगों को भी यह बीमारी हो सकती है। विशेषकर जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर होती है, उन्हें यह बीमारी बहुत जल्दी होती है। इमसें लंग्स में बलगम जमा होता है, जिसका सही समय पर इलाज नहीं होने से ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड को भी प्रभावित करती है। यह ब्लड के माध्यम से किसी भी पार्ट में फैल जाती है इसलिए पूरा ट्रीटमेंट अवश्य लेना चाहिए। इलाज बीच में ना छोड़ें। छह महीने से 18 महीने तक पूरा इलाज अवश्य करवाएं।

लंबे समय तक बुखार रहने के बाद सिर में दर्द शुरू हो जाए। दिमागी बुखार को सबसे पहले डायग्नोस करें। रीढ़ की हड्डी से पानी निकालकर जांच करवाई जाती है। लंबे समय तक सिर दर्द होना, उल्टी आना और होश में गिरावट आना। कॉम्प्लिकेशन होने पर दिमाग के पानी का प्रवाह कम हो जाता है। दिमाग में पानी की थैली का साइज बढ़ जाता है। इससे पेशेंट कोमा में भी जा सकता है। सर्जरी करके एक्सट्रा पानी को नली के जरिए बाइपास करके पेट से बाहर निकाला जाता

टीबी का प्रारंभिक लक्षण कमर में दर्द और हल्का बुखार, भूख नहीं लगना और वजन कम होना है। कमर के जिस हिस्से में दर्द हो उसका एक्स-रे करवाकर देखें। हड्डियां गल तो नहीं रही हैं। शुरुआत में डायग्नोस नहीं होने पर बीमारी फैलकर रीढ़ की 2-5 हड्डियों को गला सकती है। टीबी की मवाद बन जाती है। इससे स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव आने की वजह से हाथ-पैरों में लकवा जाता है। इससे बचने के लिए पेशंट की बड़ी सर्जरी की जाती है। ऑपरेशन से मवाद हटाया जाता है। गली हुई हड्डियों के अलावा बची हुई हड्डी को स्क्रू और रॉड से फिट किया जाता है। ऑपरेशन के बाद भीड़-भाड़ वाले इलाके में जाने से बचें। खुले स्थान पर रहें, साफ-सफाई रखें।

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