यह होते हैं मलेरिया के लक्षण, बच सकते हैं यह आसान उपाय अपनाकर

मलेरिया एक संक्रामक रोग है। यह रोग अगस्त से अक्टूबर तक के महीनों में अधिक फैलता है। वर्षा ऋतु में पानी गड्ढों आदि में भर जाता है, जिसमें एनोफेलीज मच्छर पैदा हो जाता है तथा निवास करता है। एनोफेलीज मादा मच्छर मलेरिया के रोगी को काटता है। रोगी के परजीवी मिश्रित रक्त को वह मच्छर चस लेता है। ये परजीवी मच्छर के पेट में वृद्धि करते हैं। इसके बाद यह परजीवीयुक्त मच्छर किसी अन्य स्वस्थ व्यक्ति को काटता है। काटते समय परजीवी स्वस्थ मनुष्य के रक्त में प्रवेश कर जाते हैं और यह रोग हो जाता है।

इसके लक्षण
इस रोग के मुख्य लक्षण हैं-सिर दर्द, जी मिचलाना, वमन होना, सर्दी लगकर तेज ज्वर चढ़ना, ज्वर उतरते समय पसीना आना आदि। पानी को इकट्ठा न होने दें क्योंकि मच्छर वहीं पर अण्डे देते हैं। रोगाणुनाशक पदार्थो को अंधेरे व सीलनयुक्त जगह व दीवारों पर छिड़कें। जब मच्छर दीर पर बैठें तो उसके पेट में यह विष लगने से वे नष्ट हो जाते हैं। बच्चे मुँह में उँगली न दें, खेलने के उपरान्त व भोजन से पूर्व अच्छी तरह हाथ थोयें। अशुद्ध पानी न पियें। फलों को अच्छी तरह धोकर खायें।

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