यह संकेत बताते हैं कि डिप्रेशन में चले गए हैं आप

आज की भागदौड़ भरी जिन्दगी में तनाव और व्यक्ति का चोली-दामन का साथ है। कुछ हद तक तो तनाव होना आम है, लेकिन जब इस तनाव की सीमा बढ़ जाती है, तो यह व्यक्ति के लिए घातक भी हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि आप इसके लक्षणों को पहचानकर समय रहते सचेत हो जाएं। तो चलिए जानते हैं इसके लक्षणों के बारे में−

जब एक व्यक्ति अवसादग्रस्त होता है तो उसमें शारीरिक, मानसिक व व्यावहारिक स्तर पर बदलाव होते हैं। हालांकि यह लक्षण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकते हैं।

अवसादग्रस्त व्यक्ति अक्सर उदास, निराश या चिंतित ही नजर आता है। कुछ लोग तो स्वभाव में बेहद चिड़चिडे भी हो जाते हैं। वह हमेशा ही सामान्य से अधिक बैचेन व परेशान नजर आते हैं। वह किसी से बात करने या किसी के साथ भी इन्लॉन्व होने में कोई रूचि नहीं दिखाते।

जब व्यक्ति को अपेक्षित सफलता नहीं मिलती तो वह अवसादग्रस्त हो जाता है। ऐसे व्यक्ति अपनी असफलता के लिए खुद को ही दोष देने लगते हैं या फिर खुद को बेहद असहाय व बेकार समझते हैं। वह हमेशा ही अपनी असफलताओं के बारे में सोच−सोचकर दुखी होते हैं। कभी−कभी तो वह इस हद तक नकारात्मक हो जाते हैं कि उन्हें लगता है कि अब उनके जीवन में कुछ भी अच्छा नहीं होने वाला।

ऐसे व्यक्तियों में उर्जा का स्तर न के बराबर होता है। वह किसी भी तरह की गतिविधि में भाग लेना पसंद नहीं करते। यहां तक कि रोजमर्रा के काम भी ठीक ढंग से नहीं करते।

अवसादग्रस्त व्यक्ति हमेशा ही मन में कुछ न कुछ नकारात्मक सोचते रहते हैं और यही कारण है कि वह किसी भी चीज में अपना ध्यान एकाग्र नहीं कर पाते। कुछ लोगों के लिए तो किताब पढ़ने व टीवी देखना भी मुश्किल होता है। ऐसे लोग चीजों को याद नहीं रख पाते और न ही किसी भी तरह का निर्णय करने में सक्षम होते हैं।

जो व्यक्ति डिप्रेशन में होता है, उसके सोने के तरीकों में भी बदलाव आता है। या तो वह व्यक्ति देर रात जागता है और सुबह काफी जल्दी उठ जाता है, मसलन उसे नींद नहीं आती या फिर ऐसे व्यक्ति जरूरत से कुछ ज्यादा ही सोना शुरू कर देते हैं।

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