अस्थमा का रोगी बना सकती है ये लत, ऐसे रखें खुद को सुरक्षित

वैसे तो अस्थमा हों की कई कारण होते है, लेकिन वायु प्रदूषण, स्मोकिंग से और मोटे लोगों को यह ज्यादा होता है। स्मोकिंग सीधे तौर पर अस्थमा का कतई कारण नहीं है, लेकिन जिनको अस्थमा है अगर वो स्मोकिंग कर रहे है, तो उनको यह बहुत ज्यादा होगा। इसके अलावा धूल मिट्टी के कण, तेज परफ्यूम, अगरबत्ती से निकला धुंआ, पुरानी फाइलें साफ कर रहे हैं, घर में पालतू जानवर हैं, फर वाले जानवरों से अस्थमा की बीमारी बहुत ज्यादा बढ़ती है। इसलिए पेशेंट इन सब चीजों से बचे तो बहुत अच्छा रहेगा।

जिन रोगियों को अस्थमा बहुत लंबे समय से है और सही समय पर उसका इलाज नहीं करा रहे हैं, तो एजपर्जलेस फ्यूमीगेटस फंगल इंफैक्शन होने का खतरा बहुत ज्यादा रहता है। ये लंग्स को खराब कर देता है। इसलिए अस्थमा को कभी भी इग्नोर नहीं करें।

अस्थमा के कारण श्वास नलिकाओं में क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन भी रहता है। इसका कारण है समय पर पम्प या इन्हेलर नहीं लेंगे। समय पर कोई दवा नहीं खाएंगे तो इन्फ्लेमेशन परमानेंट बनता रहेगा। इससे श्वास नलिकाएं डायलिटेशन के कारण लगातार बहुत ज्यादा फूलती जाती है। नलिकाओं के फूलने से उनके बीच इतना ज्यादा गेप हो जाता है बैक्टीरिया बहुत ही आराम से घर बना लेते हैं या फंगस आ सकती है। बैक्टीरिया का इलाज तो दवाइयों से हो जाता है, परेशानी तब होती है जब फंगस आ जाती है, उसके लिए एंटी फंगल भी अवश्य लेनी चाहिए।