इस बीमारी से होता है दिमाग कमज़ोर, जानिए इसके क्या है लक्षण और उपाय

पार्किन्संस दिमाग से जुड़ी गंभीर बीमारी है, जिसमें शरीर के विभिन्न अंगों की गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। विदित है कि दिमाग में न्यूरॉन कोशिकाएं डोपामीन नामक एक रासायनिक पदार्थ का निर्माण करती हैं। जब डोपामीन का स्तर बहुत निचे गिरने लगता है, तो दिमाग शरीर के विभिन्न अंगों पर नियंत्रण रख पाने में सक्षम नही होता है।

सामान्यतः यह बीमारी उम्रदराज लोगों को होती है, लेकिन आजकल युवाओं में भी यह मर्ज खूब देखने को मिल रहा है। आंकड़ों के अनुसार दुनियाभर में इस वक्त लगभग 70 लाख से 1 करोड़ लोग पार्किन्संस बीमारी से ग्रसित हैं। इन आंकड़ों से संदेश मिलता है कि इस संख्या में और भी अधिक बढ़ोतरी होगी, खासतौर से एशिया महाद्वीप में। इसका कारण बुजुर्गों की संख्या का बढऩा और आयु में वृद्धि होना हो सकता है।

इस बीमारी को अक्सर डिप्रेशन या दिमागी रूप से ठीक न होने की स्थिति से जोड़ा जाता है, लेकिन इस संदर्भ में यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि इस बीमारी से पीडि़त रोगी पूरी तरह मानसिक रूप से विकलांग नहीं होते है। हमे उन्हें समाज से अलग नहीं देखना चाहिए।

शुरुआती स्टेज पर डॉक्टर लक्षणों को मैनेज करने के लिए अक्सर दवाओं का सहारा लेते है, लेकिन दवाओं के प्रभावी न होने और इनके साइड इफेक्ट के सामने आने पर अंत में डीप ब्रेन स्टीमुलेशन (डीबीएस) थेरेपी बहुत कारगर साबित हुई है।