ऐसे करें खुद का बचाव, अगर आपको है श्वसन सम्बन्धी बीमारी

आजकल की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी, प्रदूषण में हो रही वृद्धि तथा अनियमित जीवनशैली के कारण श्वसन रोगों से पीड़ित व्यक्तियों की संख्या में लगातार तेजी से वृद्धि हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, विश्व की जनसंख्या का एक बहुत बड़ा भाग श्वसन विकारों से पीड़ित है और इसे पूरे विश्व में रुग्णता और मृत्यु का सबसे आम और महत्वपूर्ण कारण माना जाता है। भारत में भी परिस्थितियां अलग नहीं हैं, भारत फेफड़ों के रोगों से होने वाली मौतों की सूची में पहले पायदान पर है।

श्वसन स्वास्थ्य के संबंध में भारत के सामने मौजूद इस सबसे ख़तरनाक परिस्थिति को देखते हुए, हम सभी के लिए दीर्घकालिक रोगों, जैसे दमा आदि, की रोकथाम के लिए व्यक्तिगत मोर्चे पर बहुत ही तत्काल कदम उठाना बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन से प्राप्त आँकड़े यह भी खुलासा करते हैं कि विश्व के कुल दमा रोगियों में से 10 रोगी भारत में हैं, और इसलिए हमें श्वसन रोगों की संभावना को खुद से दूर रखने के लिए आसान व तेज कदम उठाने की सख्त ज़रूरत है।

हिमालया ड्रग कंपनी में अनुसंधान वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत डॉक्टर हमें कुछ सुझाव दे रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप श्वसन रोगों से मुकाबला करने तथा दमा जैसे रोगों से स्वयं को बचाने में बहुत हद तक सहायता पा सकते हैं।

अदरक का सेवन करेंः अदरक में ऐसे कई घटक होते हैं जो गले और श्वसन मार्ग के संक्रमणों से बचाने में मददगार हैं तथा साँस लेना आसान बनाते हैं। सुझाव दिया जाता है कि अदरक का सेवन सीधे ही या फिर चाय में तथा रस के रूप में किया जाए, क्योंकि इससे साँस लेना मुश्किल करने वाली छाती की जकड़न के उपचार में मदद मिलती है।

अपने आहार में वसाका नामक जड़ी शामिल करेंः वसाका नामक जड़ी, जिसे मालाबार नट भी कहते हैं, श्वासनली के शोथ में राहत देती है और श्वास मार्गों को खोलती है जिससे छाती की जकड़न में राहत मिलती है और बलगम का बाहर निकलना आसान हो जाता है। यह खाँसी रोकने में भी मददगार है, श्वासनली के स्रावों को पतला करती है तथा फेफड़ों की सुस्त पड़ती कार्यक्षमता बढ़ाती है। सुझाव दिया जाता है कि वसाका का सेवन बाजार में उपलब्ध रस, सीरप व कैप्सूल के रूप में किया जाए।

अजवायन पत्ती का सेवन करेंः अजवायन पत्ती (ओरेगानो) में वे सभी विटामिन और खनिज होते हैं जो हमारे प्रतिरक्षा तंत्र के लिए लाभकारी हैं और स्वास्थ्य वर्धन में मददगार हैं। अजवायन पत्ती में शोथघ्न (एंटी-इन्फ़्लामेटरी) गुण होते हैं तथा इसमें फेफड़ों की सफाई करने वाले ऐसे अन्य घटक भी भरपूर मात्रा में होते हैं जो दमा, साइनुसाइटिस एवं खाँसी जैसे रोगों के उपचार में मदद करते हैं।

पर्याप्त मात्रा में लहसुन का सेवन करेंः लहसुन को अपने विषाणुरोधी और जीवाणुरोधी गुणों के लिए जाना जाता है जो इसके औषधीय मूल्यों में वृद्धि करते हैं। इससे ऐसे संक्रमणों की रोकथाम में मदद मिलती है जो संभावित रूप से दमे का कारण बन सकते हैं। लहसुन की कली को सीधे खा सकते हैं या फिर बाजार में उपलब्ध कैप्सूलों के रूप में इसका सेवन कर सकते हैं।

धुएं/प्रदूषण से दूर रहेंः जो लोग आसानी से श्वसन रोगों की चपेट में आ जाते हैं, उनके लिए सुझाव है कि वे अपने चेहरे को मास्क से ढक कर कारों और फ़ैक्टरियों से निकलने वाले धुएं से खुद को दूर रखें। परोक्ष धूम्रपान से बचें और आतिशबाजी से दूर रहने की कोशिश करें, क्योंकि किसी भी प्रकार का धुआं फेफड़ों में अप्रिय संवेदना सक्रिय कर सकता है जो अंततः गंभीर खाँसी और घरघराहट का रूप ले लेगी। यदि आप धूम्रपान के लती हैं, तो आपको सलाह है कि आप धूम्रपान तत्काल छोड़ दें।

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