रीढ़ की हड्डी में होने वाली टीबी को ऐसे दूर करें

अगर आपका दो-तीन हफ्ते के बाद भी पीठ दर्द में आराम न हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचना चाहिए। इसकी पहचान सिर्फ एक्सरे से नहीं हो पाती है। इसके लिए एमआरआई करानी जरुरी होती है। यदि रीढ़ के बीच वाले हिस्से में दर्द हो रहा हो तो कभी भी देर नहीं करना चाहिए। रीढ़ की हड्डी की टी.बी. के दूर होने में लगभग 12 से 18 महीने का वक्त लग सकता है, लेकिन दवा कभी नहीं छोडऩी चाहिए।

ऐसे होता है मर्ज: गौरतलब है कि टी.बी. का जीवाणु फेफड़े के रस्ते खून में पहुंचता है और जीवाणु रक्त प्रवाह के जरिए रीढ़ तक भी पहुंच जाता है। जो लोग सही समय पर इलाज नहीं कराते या इलाज बीच में छोड़ देते हैं, उनकी रीढ़ विल्कुल गल जाती है, जिससे स्थाई अपंगता भी आ जाती है।

डायग्नोसिस: रीढ़ की हड्डी का पहले एमआरआई, सीटी स्कैन और फिर प्रभावित हड्डी की बॉयोप्सी जांच के जरिये टी.बी.के संक्रमण का आसानी पता लगाया जा सकता है।

इलाज

यदि रीढ़ के हड्डी के प्रभावित भाग में संक्रमण के कारण पस की समस्या बहुत अधिक हो, तो ऐसे में एसपिरेशन प्रोसीजर के जरिये पस को बाहर निकाला जाता है। कई बार टी.बी. के कारण रीढ़ कीे हड्डी में बहुत ज्यादा क्षति पहुंचने लगती है। ऐसीे गंभीर स्थिति में सर्जरी ही इसका एकमात्र इलाज है। सर्जरी के अंतर्गत स्पाइनल डीकंप्रेशन एन्ड फ्यूजन ऑपरेशन भी किया जाता है।

सर्जरी की प्रक्रिया: यह बहुत ही जटिल सर्जरी होती है। इसमें मरीज की जरूरत के मुताबिक टाइटेनियम नामक धातु से स्क्र-रॉड या टाइटेनियम केज का प्रयोग किया जाता है, जिससे क्षतिग्रस्त रीढ़ की हड्डी विल्कुल ठीक की जाती है। ऑपरेशन के बाद व्यक्ति पूर्णत: स्वस्थ हो जाता है, लेकिन टी.बी. की दवाई का कोर्स कम से कम साल भर तक अवश्य जारी रहता है।

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